अब आरक्षण के मुद्दे पर मछुआरा समाज भी उतरा सड़क पर, प्रदर्शन में शामिल हुए विधायक कुंवर निषाद भी



बालोद। विश्व मत्स्य दिवस के अवसर पर मछुआरा समाज द्वारा वाजपेयी मैदान तिलक नगर बिलासपुर में आरक्षण के लिए मछुआरा समाज ने धरना प्रदर्शन कर निकाली रैली प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के तहत बिलासपुर कलेक्ट्रेट में छत्तीसगढ़ मछुआरा समाज ने ज्ञापन सौंपा मछुआरा समाज के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ निषाद केवट समाज एवं विधायक गुंडरदेही कुंवर सिंह निषाद एवं पूर्व अध्यक्ष मछुआ कल्याण बोर्ड एम. आर. निषाद के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया जिसमें प्रदेश के समस्त प्रतिनिधियों, पदाधिकारीयों एवं बड़ी संख्या में सामाजिक जन शामिल हुए इस दौरान आरक्षण की मांग को लेकर समाज के लोग नारे लगाते रहे।*

इस दौरान विधायक ने कहा कि मछुआरा मांझी समुदाय के तहत आने वाले धीवर, निषाद(केवट), कहार, मल्लाह, भोई एवं अन्य समानार्थी जनजातियों को वर्ष 1950 तक अनुसूचित जनजाति वर्ग में रखा गया था, जिसका प्रमाण शासन के राजपत्रों में अब भी मौजूद है। लेकिन 1950 के बाद मछुआरा समुदाय के समस्त जनजातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में डालकर उन्हें आरक्षण से वंचित कर दिया गया। इसके बाद से ही इस आरक्षण को फिर से बहाली की मांग को लेकर बीते 75 सालों से मछुआरा सामुदायिक संघर्षरत है इस दौरान विधायक ने यह भी कहा कि लगातार राष्ट्रीय एवं प्रदेश मछुआरा समाज की ओर से धरना प्रदर्शन के जरिए सरकार को जगाने की कोशिश की जा रही है।

*विधायक ने कहा कि जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी एवं सरकारी नौकरियां एवं शिक्षा में आरक्षण तत्काल लागू किया जाए।

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