आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी: ठेकेदार ने कहा : ग्रामीणों की दखलंदाजी से पैदा हो रहा प्राइमरी स्कूल खरथुली के निर्माण में व्यवधान, अब तक हो जाना था काम



शिक्षा जतन योजना में ग्रामीण बन रहे बाधा, बच्चे हो रहे भवन की सुविधा से वंचित, विभाग भी कर रहा जांच के नाम पर लेटलतीफ

बालोद। विगत दिनों बालोद ब्लाक के ग्राम पंचायत भोथली के आश्रित ग्राम खरथुली में निर्माणाधीन सरकारी प्राइमरी स्कूल के अतिरिक्त भवन को लेकर ग्रामीणों द्वारा गुणवत्ताहीन निर्माण का आरोप लगाया गया था। दरअसल में उक्त भवन का निर्माण शिक्षा जतन योजना के तहत 4.85 लाख की लागत से करवाया जा रहा है । निर्माण कार्य की एजेंसी जय कंस्ट्रक्शन है। जिनके ठेकेदार ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा भवन का निर्माण अब तक हो जाना था लेकिन लगातार ग्रामीणों द्वारा बेवजह पैदा किए जा रहे व्यवधान के चलते काम पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि काम में पूरी तरह से गुणवत्ता बरती जा रही है। बिना किसी उचित तकनीकी ज्ञान के कुछ ग्रामीण बेवजह राजनीति कर रहे हैं। प्राइमरी स्कूल का भवन है लेकिन जो आरोप लगाते हैं वह मिडिल स्कूल के शाला समिति के अध्यक्ष घनाराम साहू हैं। जिनके द्वारा लगातार ग्रामीणों को भड़काकर निर्माण एजेंसी सहित आरईएस विभाग और शासन प्रशासन की छवि धूमिल की जा रही है। जो छज्जा को तोड़े जाने से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित किया गया था वह दरअसल में गुणवत्ताहीन निर्माण से संबंधित है ही नहीं। भवन का पूरा हिस्सा मजबूती से बना है। तथाकथित कुछ ग्रामीणों द्वारा छवि खराब करने के उद्देश्य से और मीडिया को भी गुमराह करते हुए अधूरी जानकारी देकर वीडियो प्रसारित किया गया। जिससे यह गलत बात जगजाहिर होने लगी कि काम ठीक नहीं हो रहा है ।जबकि ऐसा कुछ हुआ नहीं है। निर्माण एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि लगातार ग्रामीणों द्वारा पैदा किए जा रहे व्यवधान के चलते बच्चों को भवन की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। 2 साल से मामला अटकता जा रहा है। 2 साल पहले शिक्षा जतन योजना के तहत इस कार्य का ठेका रायपुर के एक व्यक्ति को मिला था। जिन्होंने वहां की असुविधाओं को देखते हुए काम करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद हमें इसका ठेका मिला और हम ग्राम हित और बच्चों के हित में काम करना चाह रहे हैं। खरथूली ऐसा गांव है जहां पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क तक नहीं है। बरसात के दिनों में भी काफी परेशानी होती है। तो वहां कई तरह की सुविधाओं की भी कमी है। इसके बावजूद हमने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए बच्चों के हित में स्कूल भवन को समय पर बनाने का फैसला किया था। लेकिन आए दिन ग्रामीणों द्वारा कुछ ना कुछ बेवजह शिकायत करके काम को रुकवाने का प्रयास किया जाता है तो इधर जांच के नाम पर विभाग द्वारा भी लेट लतीफ की जा रही है। जिससे नुकसान कुल मिलाकर हमारा हो रहा है। हमें पेनल्टी देनी पड़ रही है। काम में देरी से मजदूरों का पेमेंट आदि भी प्रभावित होता है। तो वही मटेरियल का भी नुकसान होता है। पूरी गुणवत्ता और संबंधित विभाग के इंजीनियर की देखरेख के तहत हम काम कर रहे हैं। ठेकेदार का कहना है जब काम शुरू हुआ था उस समय में भी ग्रामीणों द्वारा झूठा शिकायत किया गया था। उस समय भी अधिकारी निरीक्षण में गए थे तो सब कुछ ठीक पाया गया था। इसके बावजूद जब अब काम अंतिम चरण पर आ चुका है तो फिर से ग्रामीणों द्वारा निराधार शिकायत करते हुए गुणवत्ताहीन काम का आरोप लगा दिया गया है। जिससे अहित अंततः ग्रामीण और बच्चों का ही हो रहा है।

प्राइमरी के बच्चे बैठते हैं मिडिल के भवन में

वहीं प्राइमरी स्कूल का वर्तमान में जो वहां भवन है वह काफी दयनीय स्थिति में है। बारिश में पूरा पानी टपकता है। जिससे बच्चों को मिडिल के भवन में बैठाया जाता है। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि जो शाला प्रबंधन समिति मिडिल के अध्यक्ष घनाराम साहू है वह बेवजह की राजनीति कर प्राइमरी स्कूल समिति के अध्यक्ष दुर्गा साहू, सुदामा साहू सहित अन्य ग्रामीणों को भड़काकर आए दिन काम में रुकावट पैदा करते हैं। अधिकारी जांच में जाते भी हैं तो उस पर भी असंतुष्टि जाहिर कर देते हैं। ऐसे में विभाग और शासन प्रशासन सहित योजना को धूमिल करने का प्रयास ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि स्कूल भवन का निर्माण जल्द से जल्द हो और बच्चों को पक्का भवन नसीब हो ताकि वह आराम से वहां बैठकर पढ़ाई कर सके और बरसात में किसी तरह की दिक्कत ना हो लेकिन ग्रामीणों द्वारा लगातार पैदा की जा रही अड़चन से शिक्षा जतन योजना यहां प्रभावी ढंग से लागू होती नहीं दिख रही है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है यह सवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी ने उठाया है। तो वहीं उन्होंने ग्रामीणों से मीडिया के जरिए कहा है कि बिना किसी तकनीकी जानकारी के बेवजह आरोप लगाकर काम में व्यवधान डालना बंद करें। विभाग अपना काम कर रहे हैं हम अपना कार्य कर रहे हैं। जो भी टेंडर के तहत नियम शर्ते हैं उसका पालन करते हुए ही वहां काम हो रहा है। बच्चों के हित को देखते हुए समय पर काम पूरा हो जाना था लेकिन लगातार शिकायतों के कारण काम में व्यवधान और जांच में लेट लतीफ के चलते मामला और बिगड़ रहा है। इसलिए हम चाहते हैं कि सबके सहयोग से जल्द से जल्द काम हो और बच्चों को पक्का भवन नसीब हो। इधर मामले में जब हमने संबंधित आर ई एस विभाग के एसडीओ हरि ओम त्रिपाठी से बात की तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा भवन निर्माण को लेकर शिकायत आई है। दिवाली के बाद ही मामले में जांच के लिए जा पाएंगे। अभी इस बारे में कुछ कह नहीं सकते। वहीं सरपंच केशू गंधर्व ने कहा ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते स्वयं स्कूल भवन देखने गया था। मामला विवादित होने के कारण फिलहाल ग्रामीणों ने पुनः आवेदन देकर काम रुकवा दिया है। पंचायत प्रशासन उक्त कार्य में किसी तरह संलग्न नहीं है, आरईएस विभाग का यह काम है। वहीं इधर अब वर्तमान में स्कूल भवन में प्लास्टर का काम रुक गया है ।ऐसे में फिर बच्चों को सुविधा मिलने में और देरी होगी।

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