शिक्षक दिवस पर विशेष लेख: समाज और देश के निर्माण में शिक्षकों का अहम योगदान: दयालू राम पीकेश्वर



बालोद। राज्यपाल पुरुस्कृत प्रधान पाठक दयालूराम पिकेश्वर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मड़ियाकट्टा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर कहा कि शिक्षक समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने वाला व्यक्तित्व होता है।किसी भी देश या समाज के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। कहा जाए तो शिक्षक ही समाज का दर्पण होता है। शिक्षक के लिए कहा गया है कि “आचार्य देवो भव:’ यानी कि शिक्षक या आचार्य ईश्वर के समान होता है। यह दर्जा एक शिक्षक को उसके द्वारा समाज में दिए गए योगदानों के बदले स्वरूप दिया जाता है।
शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। कोई उसे गुरु कहता है, कोई शिक्षक कहता है,कोई आचार्य कहता है ,तो कोई अध्यापक या टीचर कहता है। ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं,जो सभी को ज्ञान देता है,सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। सही मायनों में कहा जाए तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है और शिक्षक ही समाज की आधारशिला है। एक शिक्षक अपने जीवन के अंत तक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है और समाज को रहा दिखाता रहता है,तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता है। माता पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता,उनका कर्ज हम किसी भी रूप में नहीं उतार सकते,लेकिन एक शिक्षक है जिसे हमारी भारतीय संस्कृति में माता पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है,क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है इसलिए ही शिक्षक को समाज का शिल्पकार कहा जाता है।
गुरु या शिक्षक का संबंध केवल विद्यार्थी को शिक्षा देने से ही नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर राह दिखाता है और उसका हाथ थामने के लिए हमेशा तैयार रहता है। विद्यार्थी के मन में उमड़े हर सवाल का जवाब देता है और विद्यार्थी को सही सुझाव देता है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदा प्रेरित करता है। एक शिक्षक या गुरु द्वारा अपने विद्यार्थियों को स्कूल में जो सिखाया जाता हत्या जैसा वे सीखते है,वे वैसा ही व्यवहार करते हैं।उनकी मानसिकता भी कुछ वैसी ही बन जाती है,जैसा कि वे अपने आसपास होता देखते हैं इसलिए एक शिक्षक या गुरु ही अपने विद्यार्थी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा ही विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। प्राचीन काल से आजपर्यत शिक्षा की प्रासंगिकता एवं महत्ता का मानव जीवन में विशेष महत्व है। शिक्षकों द्वारा प्रारंभ से ही प्राठ्रयक्रम के साथ ही साथ जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है।शिक्षा हमें ज्ञान, विनम्रता व्यवहार कुशलता और योग्यता प्रदान करती हैं।शिक्षक को ईश्वरतुल्य माना जाता है।
आज भी बहुत से शिक्षक, शिक्षकीय आदर्शो पर चलकर एक आदर्श मानव समाज की स्थापना में अपनी महती भूमिका का निर्वाहन कर रहे है।
आज शिक्षक दिवस है।आज का दिन गुरुओ और शिक्षकों को अपने जीवन में उच्च आदर्श मूल्यों को स्थापित कर आदर्श शिक्षक और एक आदर्श गुरु बनने की प्रेरणा देता है।

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