बालोद। ग्राम. गुजरा ब्लाक – डौंडी, जिला – बालोद में एक दिवसीय कोया पुनेम एवं संवैधानिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य आदिवासियों के युवाओं में नव ऊर्जा, नई गति, नई दिशा, नई सोंच प्रदान कर आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, पारंपरिक व्यवस्था, नार्र व्यवस्था, गौत्र व्यवस्था, पुनेम व्यवस्था, पर्यावरण सुरक्षा के साथ मानव जीवन का विकास, आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार, पांचवी अनुसूची, पेसा कानून 1996, वन अधिकार मान्यता कानून 2006, एक्ट्रोसिटी एक्ट, भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170 (ख), 2(क) के बारे में जानकारी प्रदान युवाओं को ऊर्जा से लबरेज किया गया। नार्र व्यवस्था के जानकार तिरूमाल दिनेश गावड़े ने गांव व्यवस्था के गांव राव राजा, कैना कोडो, जिम्मेदारीन, दरसवाली माताएं के बारे में बहुत ही विस्तृत जानकारी प्रदान किया गया।आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार के विषय विशेषज्ञ तिरूमाल खोरबाहरा मंडावी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 66 प्रतिशत भू-भाग एवं बालोद जिले के डौंडी ब्लाक में पांचवीं अनुसूची लागु है और इस क्षेत्र के अंतर्गत पेसा कानून 1996 लागु होता है, पेसा कानून में मात्र 5 ही धारा आता है, इस कानून के धारा 4 के अंतर्गत पांचवी अनुसूची क्षेत्र में जितने भी कानून प्रचलित है उन सभी कानून अपवाद और उपांतरणों के साथ लागू होगा, इसलिए यह कोई प्रोविजन नहीं है बल्कि अपवाद और उपांतरणों की सूची है जो सारे कानूनों में बदलाव की बात करता है।

1993 की पंचायती राज व्यवस्था को पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में भी विस्तार करने की बात संविधान के अनुछेद 243(ड) के पैरा 4 के उप पैरा (ख) में कही गई है. उसमें कहा गया है कि यदि संसद चाहे तो अपवादों और उपन्तारणों के साथ उसे विस्तारित कर सकता है. इसका मतलब है कि पंचायती राज व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्रों में सशर्तों के साथ लागू होगी. संविधान के भाग 9 के अपवादों और उपान्तरणों (पेसा की धारा 4) के साथ लागू करने की बात संविधान का अनुच्छेद 243M(4)(b) में निर्देशित है, जो पाँचवी अनुसूची के पैरा 5(1) से लिया गया है. मतलब पंचायत कानून की साधारण सरंचना से अनुसूचित क्षेत्रों की विकेन्द्रित प्रशासनिक व्यवस्था अलग होगी जिनका रूढीजन्य विधि, सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं तथा सामुदायिक संसाधनों की परंपरागत प्रबंध पद्धतियों के अनुरूप होना आवश्यक है। जब भी कोई कानून बनता है तो साल भर के अंदर में नियम बनता है लेकिन पेसा कानून के नियम को बनने में 25 साल लग गए , पेसा नियम 2022 में ग्राम सभा को शक्तियां दी गई है पेसा के अंतर्गत प्रत्येक गांव में सामुदायिक संसाधन नियोजन प्रबंधन समिति (RPMC) बनाकर गांवों के स्थानीय संसाधनों पर गांव के लोगों का अधिकार होगा , जमीन,खनिज संपदा, लघु वनोपज सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार ग्राम सभा के पास होगा, बिना ग्राम सभा के सहमति के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए गांव का जमीन अधिग्रहण नहीं की जा सकती, गैर जनजातीय व्यक्ति जमीन पर गलत तरीके से कब्जा नहीं कर सकेगा कोई ऐसा करता है तो ग्राम सभा को दखल देने का अधिकार होगा, गैर आदिवासी अगर आदिवासी की जमीन को छल से, कपट से, धोखा से कब्जा कर लिया है तो उसको वापस दिलाने का अधिकार ग्राम सभा को है। साथ ही साथ शांति एवं न्याय समिति (PJC) के माध्यम गांवों के छोटे-छोटे झगड़ों को निपटारा किया जा सकता है ।इस कार्यक्रम में रमेश उइके (गांव भूमिहार),आनंद राम(पटेल), हरिश्चंद्र भंडारी (सरपंच), फिरंता उईके (तहसील अध्यक्ष गोंडवाना समाज बालोद), विश्वकर्मा समाज, सतनामी समाज, साहू समाज, नाई समाज, गाड़ा समाज समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे ।
