बालोद/गुरुर। गुरुर एसडीएम प्राची ठाकुर ने वाहन चालक द्वारा लगाए गए आरोप को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि तबादले के आदेश से तिलमिलाकर बदले की भावना से वाहन चालक द्वारा मुझ पर झूठा आरोप लगाया गया है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है।सरकारी गाड़ी खराब होने के कारण मेरे निजी गाड़ी में ही डीजल डलवाया जाता है। लॉग बुक में खुद ही ड्राइवर ने ऐसा लिखा है । एसडीएम ने कहा उसे गुरुर से हटाकर जिला मुख्यालय में अटैच किया गया है। इसी का आदेश आते ही वह तिलमिला गया और मुझ पर झूठा आरोप लगा कर मेरी छवि धूमिल करने में लगा है। मुझ पर सरकारी वाहन का निजी कार्य के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है। लेकिन उक्त वाहन चालक का ये आरोप उसके गले की फांस बन गया है। एसडीएम प्राची ठाकुर ने मामले में कहा है कि वाहन चालक द्वारा बरती जा रही अनियमितता के चलते उसे गुरूर से हटाकर जिला मुख्यालय में अटैच किया गया है। कुछ दिन पहले ही इसका आदेश आया था। इसके बाद उसने झूठा आरोप लगाया कि मैं सरकारी वाहन का दुरुपयोग कर रही हूं। जबकि लॉग बुक में स्पष्ट लिखा है कि सरकारी गाड़ी खराब है। इसलिए मेरे निजी वाहन पर ही डीजल डलवाकर काम चलाया जा रहा था।ऐसे में उसका आरोप निराधार हो जाता है कि मैं सरकारी वाहन का इस्तेमाल निजी काम के लिए करती थी। निजी वाहन में मैं कहीं भी आ जा सकती हूं। वहीं एसडीएम प्राची ठाकुर ने ड्राइवर वाहन चालक पर आरोप लगाया है कि वह मुझे नाम से संबोधित करता था। जो कदाचार की श्रेणी में आता है। लॉग बुक में भी वह पहले सिर्फ मेरा नाम लिखा था बाद में उसने फिर अलग स्याही वाली पेन से नाम के पीछे “जी” शब्द जोड़ा है। एसडीएम ने कहा कि अक्सर वह कार्यालय में अनुपस्थित रहता है और और दंतेवाड़ा में शिक्षा विभाग में पदस्थ अपनी पत्नी से मिलने के लिए जा रहा हूं कहकर जाता था। कई बार वह बिना कोई लिखित सूचना दिए जाता था और वापस आकर अवकाश में रहने के बावजूद अनुपस्थित दिवस में भी वह उपस्थिति का हस्ताक्षर करता था। इस बात की जब जानकारी हुई तो उन्होंने मामले की खबर उच्च अधिकारियों को दी थी। उनके द्वारा बरती जा रही अनियमितता को लेकर उन्हें यहां से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। वाहन चालक कमल किशोर पर एसडीएम ने यह भी आरोप लगाया कि वह धूम्रपान करते हुए वाहन चलाता था। साथ ही महिला अधिकारी से कैसे व्यवहार करना चाहिए इसकी उसे तमीज नहीं थी। खुद ही उसने अपने लॉग बुक में जानकारी दिया है कि सरकारी वाहन चलने लायक नहीं है तो फिर मैं कैसे सरकारी वाहन का दुरुपयोग निजी इस्तेमाल में कर सकती हूं। ऐसे में वाहन चालक कमल किशोर द्वारा लगाया गया आरोप निराधार हो जाता है और मेरी छवि खराब करने के लिए उसे यहां से हटाए जाने के आदेश जारी होते ही मनगढ़ंत आरोप लगा दिया गया।
अनुपस्थिति के बावजूद उपस्थिति में हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार किया चालक ने
वही मामले में ड्राइवर कमल किशोर का कहना है कि दंतेवाड़ा में मेरा कोई परिवार नहीं रहता है। रही बात अनुपस्थिति के बाद उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने का तो वह हम करते थे। वह इसलिए करना पड़ता था कि कई बार छुट्टी के दिन भी हमें काम पर बुला लिया जाता था। लेकिन एसडीएम द्वारा कहा गया कि अक्सर वह छुट्टी में ही रहता था ।
