Exclusive: शिव महापुराण के पहले दिन ही जुटी लाखों की भीड़, देखिए वीडियो और तस्वीरें, प्रदीप मिश्रा बोले भगवान को पाने माला से ज्यादा मन की है जरूर, दी जीवन उपयोगी शिक्षा, पढ़िए 3 घंटे का सार सिर्फ यहां



बालोद । जुंगेरा में चल रहे शिव महापुराण कथा के पहले दिन कथा वाचक प्रदीप मिश्रा को सुनने लाखों की संख्या में भीड़ जुटी। पंडाल भी छोटा पड़ गया। पंडाल के बाहर भी लोग कीचड़ में भी पालीथिन बिछाकर उन्हें बैठकर सुनते रहे।

इस 3 घंटे की कथा के दौरान कथावाचक पंडित मिश्रा ने कई जीवन उपयोगी बातें बताई और लोगों को अच्छे कर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। हम उनके 3 घंटे प्रवचन का सार यहां पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा बालोद नगर संत साधुओं का डेरा है। जहां मां शीतला समिति द्वारा ये आयोजन किया जा रहा है। भूमि की सुगंध बता देती है की भूमि का तपबल कितना है। हमारी दृढ़ भक्ति बढ़ती है तो महादेव किसी ना किसी रूप में कथा करवा ही देते हैं। जहां भक्ति विश्वास प्रबल हो वहां शिव को आने में देरी नहीं। शिव का एक नाम है शंकर जिसका मतलब है जो आपकी जिंदगी में सुख की वर्षा कर दे वह है शंकर है। जब सुख बरसता है तब हम कहते हैं शंकर की हम कृपा हो गई है। यहां आए हैं तो आप खाली नहीं जायेंगे। वो सुख देने और लुटाने वाला है । उनके द्वारा छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया बोलते ही तालियां बज उठी। उन्होंने कहा जो ओरिजनल छग का निवासी है तो वह किसी को धोखा देना नही जानता। वह अपनी मेहनत में पीछे नहीं हटता। अपने कर्म करने में पीछे नहीं हटता। काम करते भगवान का नाम ले लेता है।

धान बोते वह जल चढ़ा लेता है। बोल बम का नारा है बाबा एक सहारा है । छग एक आनंद एक रस तत्व का विषय है यहां का अक्षत बाबा को चढ़ाया जाता है। शिव तत्व को प्राप्त करने की ललकता हमारे में हो। दिल से आप बाबा को रिझाने की कोशिश करिए दिखावा नहीं चलता वहां। मंदिर में घंटे बैठ जाओ भगवान नहीं मिलेगा। भगवान को पाने माला से ज्यादा मन की जरूरत पड़ती है। मन से परमात्मा को रिझाने का प्रयास करें। मन से भगवद स्मरण की ओर जाए। एक बार मुख से शिव कहने वाला का भी कल्याण होता है । उन्होंने महाबलेश्वर महादेव की महत्ता के साथ एक ब्राह्मण बेटी सोमनी की कथा बताई। और महिलाओं को अपील किया कि अपनी सुंदरता का गलत इस्तेमाल ना करें। हमारी सुंदरता, स्वरूप, देह शरीर किसी को लूटने या बर्बाद करने के लिए नहीं भगवान के भजन के लिए प्राप्त होती है। पांच दिन आप अपने भीतर भगवत भजन को उत्साहित करें। अविरल भक्ति में डूबे रहे। उन्होंने कहा प्रेम और ज्ञान ज्यादा मिले तो लोग छोड़ कर चले जाते हैं। भोजन ज्यादा देगे तो लोग छोड़ देंगे। भजन के जरिए कहा मत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा, भगवान की आंखों से तू बच नहीं पाएगा अरे वो अज्ञानी मत कर नादानी, धरा का धरा पे धरा की धरा रह जाएगा।

भक्तों के पत्र के जरिए बताई शिव की महिमा

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालु के जरिए आए पत्रों को पढ़कर बताया कि कैसे उनके शिव भक्ति से कष्ट दूर हुए । नंदिनी जवाहर पारा बालोद का पत्र में बताया गया की शादी के नौ साल बाद उन्हें बच्चा हुआ एक लड़की के आंख का कैंसर ठीक हुआ।
एक बेरोजगार युवा को शिक्षक की नौकरी मिली जो तिल्दा नेवरा में कथा सुनने आया था। पंडित मिश्रा बोले यहां दूर दूर से लोग पैदल आ रहे हैं रास्ते बंद किए गए हैं। कोई बोले की कथा सुनने जाना है तो पैदल चलना पड़ेगा तो कहिए कोई बात नही। मैं जितना चलूंगी उतना काशी से बाबा मेरे पास आयेंगे। शिवरात्रि को शंकर के मंदिर जरूर जाए। शिव का दर्शन करें जीवन को कृतार्थ करें। सारी समस्या का हल बस एक लोटा जल है।

बेल पत्र का बताया इस तरह महत्व

पूर्व जन्म में जो एक हजार का गौमाता का दान किया होता है उसके घर में बेल पत्र का वृक्ष लगा होता है। जिसने एक वृक्ष को कांटा उसके सर पे एक हजार गौमाता की हत्या का पाप चढ़ता है। एक बेल पत्र जो शिव की समर्पित करता है ,दुखी को दान करता है, वह आधा किलो सालिग्राम के सोने के सिंहासन के बराबर है।

पैसा एक ऐसी चीज है जो अंधे को भी नजर आता है।
पुरुषों से अपील किए कि इस तन का किसी की दुख मिटाने में प्रयोग करना। महिलाओं से अपील किए कि शरीर का सदुपयोग करिए। गलत विचारों से दूर रहिए। ये मानव शरीर कठिनाई से मिला है बस इसका सदुपयोग हो जाए । बुजर्ग को पंडाल तक लाने में मदद करने के अपील युवाओं से की। भोजन और भजन जमीन पर बैठकर करें। जमीन का तत्व ले। बेलपत्र खाकर देखें शुगर लेवल डाउन होगा। अंदर से बलवान बनिए।

कलयुग नहीं ,ये शिवयुग है

ये कलयुग नहीं शिव युग है । आज शंकर मंदिर में जल चढ़ाने लाइन लगाना पड़ता है। उन्होंने अंत ने कहा
कल बस यानी शनिवार 26 अगस्त को कथा समय दोपहर एक से चार बजे तक रहेगा ।बाकी दिन दो से पांच बजे तक रहेगा।

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