बालोद/ रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव को उप मुख्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। ऐसे और भी कई राज्य है जहां पर ये सिस्टम चलता है। खास तौर पर राजनीतिक अस्थिरता को दूर करने का ये प्रयास माना जाता है। चुनावी रणनीति के रूप में भी ये फार्मूला प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ में भी आगामी कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में गुटबाजी को दूर करने और एकता बनाए रखने के लिए यह बड़ा कदम आलाकमान ने उठाया है। पहले भी छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के फार्मूले को लेकर चर्चा का बाजार गर्म रहता था।

इसको लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के बीच दूरी और नाराजगी भी सामने आ चुकी थी। अब चुनाव के कुछ महीने पहले सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री का दर्जा देकर उनका सम्मान बढ़ाने का प्रयास किया गया है। वहीं विपक्ष के लिए जय और वीरू की इस जोड़ी के जरिए आगामी चुनाव में “शोले” बरसाने की तैयारी भी कर ली गई है। देखने वाली बात होगी की ये जोड़ी कितना कमाल कर पाती है। चुनाव के पहले असंतुष्टि को दूर कर उप मुख्यमंत्री बनाकर सिंहदेव और उनके समर्थकों को संतुष्ट और खुश करने का प्रयास किया गया है। इसका परिणाम आगामी चुनाव में कितना दिखता है अभी समय के गर्भ में है। दिल्ली में हुई बैठक में आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर ही यह नियुक्ति की गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार इस तरह से उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके बाद राजनीतिक गलियारे से लेकर आम जनता के बीच इस पद को लेकर जमकर चर्चा है। बात संविधान की भी होने लगी है। क्या पद संवैधानिक है या नहीं? इसके बारे में भी थोड़ा जान लेते हैं…
क्या उपमुख्यमंत्री का पद संवैधानिक पद है ?
संविधान में उपमुख्यमंत्री, उप प्रधानमंत्री पद को लेकर कोई व्याख्या नहीं की गई है. बल्कि इसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर का सम्मानजनक पद बना दिया गया है. उपमुख्यमंत्री कभी राजनीतिक हित साधने के लिए बनाया जाता है तो कभी गठबंधन धर्म निभाने के लिए. राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री को रखा जाता है.
कब से हुई डिप्टी पद की शुरूआत ?
1989 में पहली बार हरियाणा के दिग्गज नेता देवीलाल ने उपप्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली. देवीलाल के उप प्रधानमंत्री पद पीएम के तौर पर शपथ लेने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस पर केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि यह पद सिर्फ नाम के लिए है और देवीलाल अन्य तमाम मंत्रियों की तरह ही होंगे। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 9 जनवरी, 1990 को टिप्पणी की थी कि देवीलाल के पास पीएम की कोई शक्ति नहीं है। देवीलाल के उपप्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद देश में उपमुख्यमंत्री का सिलसिला शुरू हुआ. पहली बार कर्नाटक में 1992 में पूर्व विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा उपमुख्यमंत्री बने.
