
बालोद। डौंडी ब्लॉक के ग्राम पंचायत मथेना के आश्रित ग्राम किशनपुरी में यादव परिवार को ग्रामीणों द्वारा 24 अप्रैल 2013 से बहिष्कृत किए जाने का मामला सामने आया है। इस बहिष्कार के पीछे एक जमीन विवाद है। दरअसल में पंचायत प्रशासन और ग्रामीणों द्वारा पड़ोसी जिले के ग्राम तिरकादंड तक पहुंच मार्ग बनाना चाहते हैं। जिस रास्ते में रेवती बाई यादव की जमीन पड़ती है। लेकिन उन्होंने मार्ग निर्माण के लिए जमीन नहीं दी है। जिसके चलते 24 अप्रैल 2013 से ग्रामीणों द्वारा उन्हें लिखित रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है।

जिससे उन्हें कई तरह की परेशानी होती है। बहिष्कार का दंश झेल रहे इस परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जाता है। हाल ही में मामला तब उजागर हो रहा है जब गांव के सरपंच जगनू राम भेड़िया के द्वारा उक्त विवादित जमीन पर जबरदस्ती जेसीबी से खुदाई करवा कर वहां पुल पाइप डालने की कोशिश की गई। मामला 6 जून की शाम का है। जिसके बाद फिर पीड़ित परिवार ने डौंडी थाने में शिकायत की है और अपने हक की जमीन से उक्त जेसीबी और पुल को हटाने की मांग की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे जमीन देने तैयार हो जाएंगे लेकिन उनका कहना है कि जमीन खेत के बीच से नहीं बल्कि किनारे से देंगे। पंचायत पूर्व में कच्चा रास्ता बनाने के लिए उनके जमीन के बीचो बीच मटेरियल डाल चुकी है। जिसके बाद से मामला विवादों में है और इस विवाद को और बढ़ाया जा रहा है। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत कर न्याय की आस लगाई है। परिवार के लोगों का कहना है कि गांव के मजदूरों को उनके खेत में काम करने नहीं दिया जाता है। कोई भी निजी दुकानदार से सामान नहीं ले सकते हैं। बाहर ही उन्हें खरीदारी करनी पड़ती है। उन्हें गांव की सुविधाओं से वंचित किया गया है। इस मामले में हमने सरपंच जगनू राम भेड़िया से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उन्हें हमने व्हाट्सएप में शिकायत की कॉपी भी भेज कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की। लेकिन उनकी ओर से मामले में कोई जवाब नहीं आया। वही पीड़ित परिवार मामले की शिकायत कलेक्टर, एसपी से करने की बात भी कह रहे हैं।
क्या कहता है नियम: सहमति नहीं तो अधिग्रहण कैसे होगा
जानकारी के मुताबिक अगर शासन को भी किसी के निजी जमीन से होकर कोई निर्माण कार्य करना है तो जमीन मालिक की सहमति लेनी जरूरी है। जितनी जमीन ली जाती है उतने का मुआवजा भी दिया जाता है। लेकिन यहां पर बिना किसी सहमति के जबरदस्ती रोड बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जब कच्चा मार्ग बनाया गया तो उस समय भी उनके जमीन को पंचायत द्वारा कब्जा कर लिया गया और वहां मटेरियल डाल दिया गया। तब से उक्त परिवार द्वारा विरोध किया गया तो ग्रामीणों ने उन्हें गांव से अलग कर दिया बहिष्कृत ग्रामीण इसी बात पर अड़े हैं कि अगर रोड बनानी है तो हम सड़क के लिए खेत के किनारे से जमीन देने तैयार हो सकते हैं। लेकिन बीचो-बीच नही देंगे। बीचो-बीच जमीन देने से खेत दो भागों में बट जाएगा और किसानी करने में भी मुश्किल होगा। बिना किसी सहमति के प्रशासन तो अधिग्रहण कर ही नहीं सकती तो फिर पंचायत जबरदस्ती क्यों कर रही है यह समझ के परे है। जब इस बात का विरोध किया जाता है तो परिवार को बहिष्कार का दंश झेलना पड़ता है और ऐसा 2013- 14 से चला आ रहा है। पंचायत प्रशासन और ग्रामीण उनके खेत के बीचो बीच से ही सड़क बनवाने की बात पर अड़ी हुई है।
थाने में हुई लिखित शिकायत

बुधवार को रेवती बाई पिता बृजलाल, जाति ठेठवार, निवासी किशनपुरी, तहसील- डौण्डी, जिला बालोद ने मामले की लिखित शिकायत थाने में की जिसमें उन्होंने बताया है कि मेरे नाम पर ग्राम किशनपुरी में भूमि नं0 221 रकबा 1.51 है, भूमि राजस्व अभिलेख में दर्ज है। उक्त भूमि पर ग्राम पंचायत मथेना आश्रित ग्राम किशनपुरी के निवासी द्वारा मुझे दिनांक 25 अप्रैल 2013 से गांव से बहिस्कृत कर मेरी भूमि के बीचो बीच कच्ची सड़क निर्माण किया गया है। तथा दिनांक 06 जून 2023 को शाम के समय सरपंच जगनु राम भेड़िया एवं अन्य ग्रामवासीयों द्वारा पुनः जे.सी.बी क्रमांक. CG 19BM6340 के माध्यम से मिट्टी व पुल डाला गया है। खेत में मिट्टी डालने पर मुझे खेती कार्य करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एवं सरपंच व ग्रामवासियों द्वारा गांव से बहिस्कृत कर मानसिक प्रताड़ना करता है और खेत जाने-आने के लिए मना एवं गाली गलौच करते है। जिससे मैं अत्यधिक मानसिक रूप से परेशान हूँ । अतः मेरे भूमिस्वामी हक की भूमि से मिट्टी व पुल को तत्काल हटाने की आदेश देने की कृपा करे एवं प्रताड़ित करने वाले सरपंच व ग्रामवासियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाए।
तत्कालीन कलेक्टर राजेश सिंह राणा के कार्यकाल में भी उछला का मामला
पीड़ित यादव परिवार ने बताया कि ऐसा नहीं है कि उनके परिवार को बहिष्कार की शिकायत पहले भी नहीं हुई है। जब कलेक्टर राजेश सिंह राणा बालोद जिले में पदस्थ थे उस समय भी उन्होंने मामले की शिकायत की थी ।तब प्रशासनिक अफसरों ने गांव में सुलह कराई थी। कुछ दिन तक माहौल ठीक था लेकिन वापस ग्रामीण उनके साथ दूरी बनानी शुरू कर दी। उनके साथ भेदभाव और उपेक्षा होने लगी ।जिसके बाद फिर परिवार ने भी सोच लिया कि वे ऐसे ही गुजारा कर लेंगे और फिर कहीं शिकायत नहीं करते रहे। परिवार में बेटी की शादी हुई तो गांव को सबको न्यौता दिया गया। लेकिन ग्रामीण शादी में शामिल नहीं हुए। उनकी खेती किसानी जैसे तैसे चलती रही लेकिन हाल ही में सरपंच द्वारा बीच से ही सड़क बनवाने की बात को लेकर वहां खुदाई करवा दी गई। जिसके बाद मामला फिर प्रकाश में आया है।
