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6 माह की बच्ची के गले में फंस गई फूल की पंखुड़ी, शहीद अस्पताल में बची जान, परिजन बोले डॉक्टर को- आप हैं भगवान

दल्लीराजहरा । जाको राखे साइयां मार सके ना कोये कुछ ऐसी चरितार्थ हुआ दल्लीराजहरा के शहीद हॉस्पिटल में 30 अक्टूबर दिन रविवार को , 6 महीने की बच्ची का सफल इलाज के लिए बच्ची के परिजन ने कहा आप डॉक्टर नहीं भगवान हो और शहीद हॉस्पिटल मंदिर है । कटरेल निवासी मन्नालाल गावडे की 6 महीने की पुत्री माही घर में रो रही थी। जिसे हंसाने व खेलने के लिए जासन का फूल देकर उसकी दादी शकुन के पास छोड़कर अपने काम से चला गया। कुछ देर पश्चात बच्ची पर चाचा की नजर पढ़ा तो बच्ची छटपटा रही थी। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रहा था। आनन-फानन में सपरिवार बच्ची को नलकसा निवासी डॉ नरेटी के पास ले गया वहां उन्होंने परिजनों को तत्काल शहीद हॉस्पिटल ले जाने का निर्देश दिया। बच्चे की मां गुंजन गावड़े ने बताया मेरी बच्ची बेसुध हो चुकी थी। जिसे तत्काल मोटरसाइकिल से शहीद हॉस्पिटल में लाएं ।जहां तत्काल नर्स लोग चेकअप करके डॉक्टर को बुलाया हॉस्पिटल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर ज्योति ने बच्ची को चेकअप किया तो पता चला कि उसके गले के बहुत भीतर कुछ फंस गया और। जिसे ओ.टी ले जाकर लगभग आधा घंटे के मशक्कत के बाद गले से पत्तेनुमा चीज निकलकर देखा तो वह जासंन फूल का पंखुड़ी था। जिसके बाद बच्ची को सामान्य वार्ड में भर्ती कर इलाज जारी है और वह अभी चिल्ड्रन वार्ड में स्वाथ्य लाभ ले रही है। अभी माही के साथ उसकी माँ गुंजन गावडे और उसकी दादी सकून गावडे डॉक्टर ज्योति के गुण गाते नहीं थक रही है । और बहुत ख़ुशी ख़ुशी डॉक्टरों को भगवान की संज्ञा दे रही है । बिहारीलाल ठाकुर (शहीद हॉस्पिटल ट्रस्ट एवं व्यवस्थापन कमेटी सदस्य), रवि सहारे (प्रवक्ता छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ) ने कहा
उल्लेखनीय है कि शहीद हॉस्पिटल में सांप काटने वाले गंम्भीर मरीजों का व कोरोना काल में हजारो मरीजों का भी सफल इलाज किया है। जिससे जिले व आसपास के जिले के लोगों के लिए शहीद हॉस्पिटल वरदान साबित हुआ है ।गौरतलब है कि एक पूंजीपति सरकार में राजनीतिक पहुंच रखकर शहीद हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सक डॉक्टर सैबाल जाना और दीपू सेन गुप्ता को निलंबित करवाया है ।जिसका अस्पताल परिवार आम जनता किसान मजदूर व पूरा लाल हरा परिवार घोर निंदा करता है और राज्य मेडिकल काउंसिल से निलंबन वापसी की मांग करता है ।

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