बालोद। छत्तीसगढ़ का कैलाश कहे जाने वाले बालोद जिले के भोला पठार मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार को शिव जी को जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भीड़ जुटी। मंदिर समिति से जुड़े हुए भक्तों सहित आसपास के गांव के लोग भी गांव से 18 किलोमीटर दूर बालोद तक पैदल कांवर यात्रा निकाले और तांदुला नदी से जल लेकर वापस भोला पठार पर पहुंचकर जल अर्पण किया गया। इस कांवर यात्रा में शिवलिंग झांकी भी बनाई गई थी जो आकर्षण का केंद्र रहा। ग्राम पर्रेगुड़ा में भोलापठार के पावन धरा पर सावन के अंतिम सोमवार को भोलेनाथ के भक्तों और कांवड़ियों का विशाल जनसमूह उमड़ा। प्रातः 10 बजे कांवड़िये जल लेने बालोद के रामघाट पहुंचे जहां कांवड़ में जल लेकर पदयात्रा करते हुए पर्रेगुड़ा पहुंचे। ग्राम पर्रेगुड़ा में शिव मंदिर समीप सभी कांवड़ियों का जनसमूह एक साथ पानी की बौछार के बीच डीजे की धुन में भोलेनाथ के भजन पर नृत्य करते रहे। हर-हर, शंभू-शंभू शिव महादेवा जैसे हाल ही में चर्चित गाने पर घंटों लोग थिरकते रहे। नाचते गाते सभी भक्त युवक हो या युवती सभी भोले की भक्ति में लीन रहे। ततपश्चात कांवड़ियों का दल भोलापठार के लिए रवाना हुआ। बोलबम के जयकारों के साथ तमाम श्रद्धालु और कांवड़ियों का जत्था मंदिर पहुंचा जहां क्षेत्र के सैकड़ों की तादाद में आये भक्तों ने सावन के अंतिम सोमवार को अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिवजी को बेल पत्र, दूध, शहद के साथ ही जलाभिषेक किया गया। एक साथ कांवड़ियों के विशाल जनसमूह के एकत्रित होने से मंदिर की छटा में चार चांद लग गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जितेन्द्र साहू प्रदेश महामंत्री कांग्रेस कमेटी थे। अध्यक्षता रमशीला साहू पूर्व महिला बाल विकास मंत्री ने की। विशेष अतिथि के रूप में डॉ गंभीर सिंह ठाकुर पूर्व मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी दुर्ग, डॉ आरएस बारले पद्मश्री सम्मानित, धनेश्वरी सिन्हा जिला पंचायत सदस्य बालोद, अमृता बारले मिनी माता सम्मान से सम्मानित, द्रोपदी वर्मा जनपद सदस्य बालोद, पालसिंह भुआर्य जनपद सदस्य गुरुर, लीलाराम डड़सेना सरपंच करहीभदर, दिनेश सिन्हा सरपंच सांकरा (क) मंचासीन थे।
महाप्रसादी का रहा प्रबंध
मीडिया प्रभारी मोहित भास्कर ने बताया कि कांवड़ियों के लिए मंदिर में प्रवेश के लिए बोलबम युवा संघ के कार्यकर्ताओं को दायित्व दिया गया था। जिससे मंदिर में भगदड़ की स्थिति निर्मित न हो साथ ही जलाभिषेक के पश्चात सभी भक्तों को महाप्रसादी के रूप में खिचड़ी का वितरण किया गया। इस आयोजन में भोलापठार के पदेन अध्यक्ष सरपंच बिमला बाई देहारी, अध्यक्ष रामजी ठाकुर, बोलबम युवा संघ अध्यक्ष इंद्रकुमार तारम, सचिव इंद्रजीत विश्वकर्मा, हीरालाल यादव, महेन्द्र तारम, पुरुषोत्तम निषाद एवं समस्त ग्रामवासियों का सहयोग रहा।
छग का कैलाश कहते हैं इस जगह को
बता दें कि भोला पठार को छत्तीसगढ़ के कैलाश के रूप में भी जाना जाता है। यह पठार 400 फीट की ऊंचाई पर है।मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को लगभग 200 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है। किवंदती है कि माता सीता के हरण के बाद जब भगवान राम उन्हें ढूंढने निकले थे तो वे इस पहाड़ी से होकर गुजरे थे। इस दौरान माता पार्वती ने भगवान राम की परीक्षा ली थी, जिस कारण इसे दंडकारण्य क्षेत्र भी कहा जाता है। भगवान राम से भेंट करने के लिए भगवान भोलेनाथ भी इस पहाड़ पर पहुंचे थे। यहां एक बुझा भगत की कहानी भी प्रचलित है जिनसे इस जगह को पहचान मिली। मंदिर परिसर में एक ऐसा कुंड है, जो कभी नहीं सूखता है. इस कुंड को शिव कमंडल के नाम से जाना जाता है। कुंड के पानी से कई तरह की बीमारियों का इलाज होने का दावा लोग करते हैं।
