मिलिए इनसे ये हैं स्कूल की “पैडवूमेन” जो छात्राओं और महिलाओं को देती है स्वच्छता की सीख तो महिला दिवस पर नैपकिन देकर की एक नई शुरुआत



और भी कई सकारात्मक कार्यों से शिक्षिका कैशरीन बैग ने बनाई अपनी खास पहचान

बालोद। डौंडीलोहारा ब्लाक के ग्राम भन्डेरा हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षिका कैशरीन बैग अब अपने स्कूल की पैडवूमैन के नाम से जानी जाती है। आपको तो वह फिल्में याद ही होगी “पैडमैन” जिसमें अक्षय कुमार अभिनेता थे। जो कि महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाली दिक्कतों को लेकर जागरूक करते थे और उन्हें नैपकिन के इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। ऐसा ही कुछ काम एक शिक्षिका ने अपने स्कूल में किया और उन छात्राओं को महिला दिवस पर उनका सम्मान बढ़ाते हुए उन्हें सेनेटरी पैड नैपकिन वितरित किया और उन्हें माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूक किया गया। अभियान स्कूल तक ही नहीं बल्कि गांव की महिलाओं के बीच जाकर शिक्षिका ने उन्हें भी स्वास्थ्य शिक्षा दी। शिक्षिका कैशरीन बैग सिर्फ स्कूल में पढ़ाने को लेकर सीमित नहीं है बल्कि अपने कई नवाचार और समाज सेवा के चलते उनकी क्षेत्र में एक अलग ही पहचान है। इसके प्रमाण उनके कई कार्यों और प्रयासों को देखकर समझ सकते हैं।

इस महिला दिवस को भी उन्होंने कुछ खास करने की सोंची और स्कूल में परीक्षा दिलाने आने वाली सभी छात्राओं को अपनी ओर से उन्होंने सैनिटरी नैपकिन भेंट की और उन्होंने छात्राओं को कहा कि कोई भी परेशानी हो तो बेझिझक उनसे कहे। गांव की महिलाओं को हर क्षेत्र में नेतृत्व के आगे आने के लिए भी उन्होंने प्रोत्साहित किया। इतना ही नहीं उन्होंने ग्राम पंचायत भन्डेरा की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हस्तकला में कौशल और व्यवसायिक शिक्षा के लिए भी प्रयास किया और उन्होंने उन्हें कुछ प्रशिक्षण भी दिया। श्रीमती कैशरीन बेग,व्याख्याता शासकीय हाई स्कूल भंडेरा, डौंडीलोहारा जिला बालोद ने बताया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैंने कुछ सोचा कि कुछ करूं और मैंने बोर्ड एग्जाम की ड्यूटी करने के पश्चात बच्चों को सेनेटरी नैपकिन वितरित किया।

साथ ही मैंने अपने ग्राम भंडेरा की सरपंच श्रीमती खेमीन ढाले से अनुमति लेकर ऐसी महिलाएं जो कुछ स्वरोजगार करना चाहती है, समूहों से जुड़ी हुई है उन्हें हस्तकला में कौशल और व्यवसायिक शिक्षा देने प्रयास शुरू की। साथ ही ऐसे समूहों से भी जाकर मिली जो इस प्रशिक्षण को लेना चाहती हैं। मुझे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ। उनका सकारात्मक और कुछ करने की इच्छा थी। यह कार्य मैं बहुत दिनों से करना चाहती थी किंतु ऐसा हुआ कि विशेष दिन पर महिलाओं के लिए कुछ विशेष करूं। मैंने उसका आगाज किया और हम जल्द ही इसे मूर्त रूप देने वाले हैं। इसमें हम अपने विद्यालय के बच्चों को हस्तकला व्यवसायिक शिक्षा तो देते हैं। साथ ही हम ग्राम के उन महिलाओं ,बच्चे को भी प्रशिक्षित करना चाहती हूं जो कि कुछ सीख कर के और आय का स्रोत मिल सके । वे वोकेशनल एंड क्राफ्ट और कबाड़ से जुगाड़ के द्वारा ऐसे बहुत सी वस्तुएं बना करके अपना आय बढ़ा सकती हैं।

स्काउटिंग की वजह से समाज सेवा को लेकर हमेशा रहती है तत्पर

बता दें कि कैशरीन बैग का स्काउटिंग के क्षेत्र में किया गया कार्य हो या फिर शिक्षा के क्षेत्र में दोनों ही बच्चों से जुड़े हुए कार्य है,स्काउटिंग में बच्चों को सुनागरिक बनाने का लक्ष्य होता है। यह दायित्व लीडर के द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। बच्चों के लिए इंस्पायर अवार्ड, बाल विज्ञान कांग्रेस, ऑनलाइन कक्षाएं ,शून्य निवेश में नवाचार या फिर अमाराईट प्रोजेक्ट सभी गतिविधियों को बच्चों को कराया जाता है। एस सी ई आर टी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में शाला सुरक्षा एवं व्यक्तिगत सुरक्षा की गतिविधि हो या फिर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार की गई बालवाड़ी हो, उसमें उनके द्वारा प्रशिक्षण लिया गया एवं आगामी दिवसों में इन प्रशिक्षण को इनके द्वारा कराया जाएगा। स्काउटिंग से जुड़े होने के कारण लोगों के प्रति सेवा भाव शुरू से उनके मन में है और इस काम में वह हमेशा प्रयासरत रहती है।

स्कूल में यह नवाचार भी उनकी देन

परिसर में लगे पौधों की सुरक्षा टूटे हुए बेंच कुर्सी के फ्रेम से घेरा बनाया गया है। बाल विज्ञान कांग्रेस द्वारा कबाड़ से जुगाड़ पर गांव की सर्वे किया गया। जिसमें वेस्ट वस्तु की मात्रा उपयोग प्रबंधन निपटारा घर पोस्ट ,ऑफिस ,स्कूल आंगनबाड़ी, दुकान इत्यादि स्थान का किया गया। हस्तकला की वस्तु बनाना व्यवसायिक शिक्षा देना वेस्ट सामान पेपर बोर्ड मॉडल तैयार कर शो पीस डोरमेट ,पेपर बैग,मोमबत्ती विभिन्न प्रकार के फ्लावर निर्माण करना, उसे जुगाड़ करके निपटान करते हैं लोहा निगम से गाड़ी की व्यवस्था की। कोरोना काल में मास्क, हर्बल सेनेटाइजर का, वितरण किया गया। सोशल मीडिया का प्रयोग करके जनसंपर्क द्वारा जन जागरूकता फैलाई , वॉल पेंटिंग द्वारा जन जागरूकता की गई। बालिका शिक्षा ,वैक्सीन उच्च शिक्षा के लिए पपेट शो किया गया।

परिवार का मिला पूरा समर्थन इसलिए भी आगे बढ़ पाई

मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाली कैशरीन रोज भिलाई से बस में सफर करके स्कूल में पढ़ाने के लिए आती है। वर्षों से उनका यह सफर जारी है और इसी के चलते उनका संघर्ष भरा जीवन सफलता की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि उन्हें उनके परिवार का भी पूरा समर्थन मिलता है। इसलिए वह एक महिला होकर इतनी आगे बढ़ पाई है और चाहती है कि अपनी तरह दूसरी महिलाओं को आगे करें। बेटियों को प्रोत्साहित करें। बेटियां या महिलाएं इस चारदीवारी व पर्दे में ही ना रहे। बल्कि वह जो कुछ कर सकती है उनमें जो काबलियत है वह सब करें। आज सबको बराबर का दर्जा दिया गया है। महिला दिवस पर जेंडर इक्वलिटी यानी लैंगिक समानता को लेकर भी उन्होंने छात्राओं के जरिए प्रेरणा देने का प्रयास किया।

You cannot copy content of this page