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शिक्षा के मंदिर में यह कैसी सुरक्षा व्यवस्था? स्कूल के भीतर बिजली ट्रांसफार्मर हटवाने के लिए पंचायत प्रतिनिधि भी लगा चुके गुहार, पर सुनवाई नहीं, अब हिंद सेना ने उठाई आवाज

बालोद/ गुरुर। स्कूलों को बाधा रहित वातावरण बनाने की बात सरकार कहती है। जहां दिव्यांगों के लिए रैंप बनाए जाते हैं तो वहीं हर बच्चे और शिक्षकों के लिए पढ़ाई में कोई बाधा ना हो ऐसी सुविधा देने की बात होती है। लेकिन गुरुर ब्लॉक में एक ऐसा स्कूल है जहां पर स्कूल परिसर में ही बिजली का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। जिसमें आए दिन चिंगारी निकलती रहती है। मामला नारागांव के आश्रित ग्राम किनारगोंदी के प्राइमरी स्कूल परिसर का है। जहां अक्सर शॉर्ट सर्किट होता रहता है। इससे बच्चों और शिक्षकों को भी करंट का खतरा बना रहता है। कई बार स्थानीय ग्रामीण सहित पंचायत प्रतिनिधि और शाला प्रबंधन समिति भी इस बात को उठा चुकी है कि इस ट्रांसफार्मर को स्कूल परिसर से हटाकर बाहर शिफ्ट किया जाए। लेकिन अधिकारियों के कान के नीचे जूं तक नहीं रेंग रही। लगभग 1 साल से इसकी मांग उठाई जा रही है पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में समाज सेवी संगठन हिंद सेना इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई है और विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता के नाम से ज्ञापन देकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। हिंदसेना के मुख्य संयोजक तरुण नाथ योगी ने कहा कि बच्चों के जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उक्त ट्रांसफार्मर स्कूल परिसर से हटना चाहिए। वरना हिंदसेना आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने बताया कि इसे हटाने को लेकर ग्राम पंचायत द्वारा भी प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। जो कि 21 सितंबर 2021 को हुआ था। लेकिन इस पर भी शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। आए दिन बच्चों के बीच बिजली करंट का खतरा मंडराता रहता है। क्योंकि कुछ बच्चे खाना छुट्टी के दौरान ट्रांसफार्मर के आसपास भी खेलते रहते हैं। ट्रांसफर स्कूल मैदान में ही है। जहां कई बार शॉर्ट सर्किट होने पर चिंगारी भी निकलती रहती है। पूर्व में ऐसी घटना भी घट चुकी है। जिससे किसी भी समय अप्रिय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। लेकिन शिक्षा विभाग ना ही संबंधित विभाग इस ट्रांसफार्मर को स्कूल से बाहर करने को लेकर ध्यान नहीं दे रहा है। यह कितनी अजीब विडंबना है कि बच्चे खतरे के बीच में पढ़ रहे हैं और वर्षों से यहां ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया। जोकि लापरवाही को भी दर्शाता है।

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