
बालोद/रायपुर/नईदिल्ली ।खराब स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहीं महान गायिका लता मंगेशकर का रविवार की सुबह 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी बहन उषा मंगेशकर ने यह जानकारी दी। वह पिछले करीब एक महीने से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थीं। जानकारी के अनुसार सुबह 8.12 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। आठ जनवरी को वह कोरोना संक्रमित हुई थीं। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की यादें छत्तीसगढ़ से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी में एकमात्र गाना भकला फिल्म के लिए छूट जाही अंगना दुवारी,,,, गाया था। जो अपने दौर का फेमस गाना था और आज भी यह लोगों का पसंदीदा है। जब भी शादी ब्याह में विदाई का अवसर आता है यह गाना गूंजता है। स्वर कोकिला लता मंगेशकर एक ऐसी शख्सियत रही जिसने संगीत की दुनिया में अलग ही मुकाम हासिल किया। क्या आप जानते हैं लता मंगेशकर जी का नाम छत्तीसगढ़ी फिल्मों से भी जुड़ा है। उन्होंने एक ऐसा यादगार छत्तीसगढ़ी गीत गाया है जो आज भी लोगों की जुबान से उतरा नहीं है। वैसे तो छालीवुड में कई फनकार है लेकिन लता मंगेशकर से गीत गवाने के लिए यहां के गीतकार और डायरेक्टर को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब जाकर 17 साल पहले साल 2005 में उन्होंने छालीवुड को अपनी नायाब आवाज से पहचान दी थी।
मिठाई खिलाने दी थी 50 हजार रुपए
लता मंगेशकर की आवाज में गाया पहला छत्तीसगढ़ी गीत 22 फरवरी 2005 को मुंबई के स्वरलता स्टूडियो में रिकॉर्ड किया था। साथ ही लता मंगेशकर ने लोगों को मिठाई खिलाने गीतकार मदन को 50 हजार रुपए दिए थे। एक इंटरव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ के मशहूर गीतकार मदन शर्मा ने बताया था कि लता दीदी को गाने के लिए राजी करना उनकी जिंदगी का अब तक का सबसे मुश्किल काम रहा। इस काम के लिए चार बार मुंबई के चक्कर लगाने पड़े।
लता जी से गाना गंवाने रखा था व्रत
नवंबर 2004 से लेकर फरवरी 2005 तक चार बार मुंबई के चक्कर लगाए, तब जाकर लता दी से गाने के लिए हां सुनने मिला। पहली बार गए तो पता चला कि वो विदेश गई हैं। दूसरी बार गए तो वो पुणे में थीं। तीसरी बार भी कुछ ऐसा ही हुआ और चौथी बार में ऊषा जी के जरिए उनसे मुलाकात हुई और हमने रिकॉर्डिंग की। बार मैंने तय कर लिया था कि जब तक लता दी गाना रिकॉर्ड नहीं कर लेंगी तब तक उपवास रखूंगा। शाम 6 बजे रिकॉर्डिंग के बाद ही मैंने व्रत तोड़ा।
फिल्म भकला के लिए गाया था ये मशहूर गीत
लता मंगेशकर ने छत्तीसगढ़ी फिल्म भखला के लिए गीत गाया। इस गीत को लता दीदी ने छत्तीसगढ़ी बोली में ही गाया था। गीत के बोल हैं, छूट जाही अंगना अटारी …. छूटही बाबू के पिठइया। शादी की विदाई पर आधारित गीत मदन शर्मा ने लिखा था और संगीतकार थे कल्याण सेन। गीतकार मदन को लता ने फीस की तय रकम 2 लाख में से 50 हजार रुपए मिठाई खाने के लिए लौटाते हुए कहा था कि ये मेरा पहला छत्तीसगढ़ी गीत है तो सबको मेरी तरफ से मिठाई खिलाना।
खैरागढ़ यूनिवर्सिटी ने नवाजा है डी-लिट की उपाधि से
मशहूर गायिका लता मंगेशकर की छत्तीसगढ़ से एक और याद जुड़ी है। 9 फरवरी 1980 को खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत यूनिवर्सिटी ने लता मंगेशकर को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए डी-लिट की उपाधि से नवाजा था।
संगीत के उपासको में शोक की लहर
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन से बालोद जिला सहित पूरे छत्तीसगढ़ के संगीत उपासको में शोक की लहर है। दल्ली राजहरा की गायिका व पार्षद टी ज्योति ने कहा कि वह अपना प्रेरणास्रोत लता मंगेशकर को मानती थी। उनके निधन से वह स्तब्ध है। उनसे प्रेरित होकर वह भी गाना गाना सीखी थी। आज वे जिस मुकाम पर है इसके पीछे लता मंगेशकर की आवाज का जादू ही है। उनके निधन पर उन्होंने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।
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