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विधायक संगीता सिन्हा द्वारा चक्काजाम की चेतावनी का असर, नेशनल हाईवे विभाग के अफसरों ने देवरानी जेठानी पुल के पास बनाया ब्रेकर

बालोद/ गुरुर। संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा ने विगत दिनों देवरानी जेठानी नाला पुल कुलिया के पास ब्रेकर बनाने की मांग को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी नेशनल हाईवे विभाग के अफसरों को दी थी। इस दौरान उन्होंने पत्र जारी कर कहा था कि हादसे रोकने के लिए अगर पर्याप्त इंतजाम नहीं किया गया, यहां पर ब्रेकर नहीं बनाया गया तो वे 10 दिनों बाद धरना प्रदर्शन चक्का जाम पर बैठेंगे। अंततः विधायक की चेतावनी के बाद नेशनल हाईवे विभाग के अफसर हरकत में आये और शनिवार की शाम को यहां पर ब्रेकर बनाया गया। जानकारी के अनुसार अल्टीमेटम के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे थे। जिसके बाद फिर विधायक ने कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को भी इस पर गंभीरता दिखाने के लिए कहा। जिसके बाद फिर विभाग के अधिकारी ब्रेकर बनाने में जुटे। अब उम्मीद की जा रही है कि यहां पर हादसे कम होंगे। ज्ञात हो कि देवरानी जेठानी पुल, कुलिया इस नेशनल हाईवे पर एक प्रमुख डेंजर जोन माना जाता है। यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं और इन हादसों में कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। 26 अक्टूबर को जारी किए गए अल्टीमेटम पत्र में विधायक संगीता सिन्हा ने कार्यपालन अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग रायपुर / बालोद को लिखा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग क.-930 में ग्राम कुलिया के देवरानी-जेठानी नाला पर निर्मित पुल के दोनों ओर गति अवरोधक नहीं बनाये जाने पर चक्का जमा किया जाएगा। पत्र में कहा गया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग कमांक 930 में ग्राम कुलिया के देवरानी-जेठानी नाला पर निर्मित पुल के दोनों छोर पर खतरनाक मोड़ है एवं रेलिंग भी टूटा हुआ है। सीधी सड़क के बाद पुल के पास ही अचानक खतरनाक मोड़ आ जाने से वाहन चालक हड़बड़ा जाते हैं जिसके कारण वाहन पर उनका नियंत्रण छूट जाता है एवं वे अनियंत्रित हो कर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। अभी तक उक्त पुल पर कई दुर्घटनाएं घट चुकी है जिसमें लगभग 20-25 लोगों की मृत्यु हो चुकी है एवं कई बार वाहन चालक वाहन सहित पुल के नीचे गिर कर अपनी जान गँवा चुके हैं। यहाँ होने वाली दुर्घटनाएं अत्यंत गंभीर होती है जिसमें मौके पर ही लोगों की मृत्यु हो जाती है। यदि पुल के दोनों छोर पर गति अवरोधक निर्मित रहता तो इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता था एवं जन-धन की क्षति को रोका जा सकता था। इस संबंध में मैंने कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग के जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराते हुए गति अवरोधक बनाने की मांग की लेकिन उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए गति अवरोधक बनाने में अपनी असमर्थता व्यक्त की। पुल का डिजाईन यदि सही रहता तो यहाँ गति अवरोधक बनाने की आवश्यकता नहीं थी लेकिन इस पुल के दोनों छोर पर मोड़ इतना खतरनाक है कि जब तक गति अवरोधक नहीं बनाया जायेगा तब तक दुर्घटना घटित होते रहेगी। ऐसी स्थिति में जनहित को दृष्टिगत रखते हुए उक्त पुल के दोनों छोर पर गति अवरोधक बनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि 10 दिवस के भीतर उक्त पुल के दोनों छोर पर गति अवरोधक निर्मित नहीं किया जाता है तो राष्ट्रीय राजमार्ग कमांक-930 पर कांग्रेसजनों के साथ उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं चक्का जाम किया जावेगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। विधायक के इस अल्टीमेटम का असर हो गया है और जो अफसर पहले नियमों का हवाला दे रहे थे वह विधायक के पत्र व चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए पुल के दोनों ओर ब्रेकर बनाए हैं। तो वहीं विधायक के इस जनहित पहल से लोगों में भी खुशी है।

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