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आज़ादी के अनजाने यादगार आंदोलनों को डाक टिकटों में किया गया प्रदर्शित

स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलनों की स्मृतियां समेटे डाक टिकटों की प्रदर्शनी

बालोद। 15 अगस्त 1947 को भारत को मिली आजादी लंबे संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस और देशभर में चले अनेक आंदोलनों की परिणति थी। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में कुछ घटनाएं व्यापक रूप से चर्चित हैं, जबकि कई आंदोलन और उनके नायक आज भी अपेक्षाकृत कम जाने जाते हैं। ऐसे ही आंदोलनों और संघर्षों की स्मृतियों को डाक टिकटों एवं विशेष आवरणों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

1806 का वेल्लोर विद्रोह

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले वर्ष 1806 में वेल्लोर सैनिक विद्रोह हुआ था। इस विद्रोह में भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बगावत की थी। इसके बाद वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ने देशव्यापी आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। इसमें नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे और कुंवर सिंह जैसे सेनानियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पाईका विद्रोह और नील विद्रोह

1817 का पाईका विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की शोषणकारी नीतियों और जबरन कर वसूली के विरोध में उड़ीसा में बख्शी जगबंधु के नेतृत्व में हुआ। वहीं 1860 का नील विद्रोह बंगाल के किसानों द्वारा अंग्रेज बागान मालिकों के खिलाफ किया गया आंदोलन था। किसान जबरन नील की खेती कराए जाने का विरोध कर रहे थे।

कूका और रेशमी रूमाल आंदोलन

1872 के कूका आंदोलन में पंजाब के नामधारी सिखों ने अंग्रेजी शासन की नीतियों के विरोध में आंदोलन किया। इसके बाद 1913 के रेशमी रूमाल आंदोलन के दौरान देवबंदी मुस्लिम नेताओं ने ब्रिटिश शासन से मुक्ति के लिए विदेशों से सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया। संदेशों को रेशमी कपड़े पर लिखकर भेजे जाने के कारण इसे रेशमी रूमाल आंदोलन कहा गया।

असहयोग से भारत छोड़ो आंदोलन तक

1920 के असहयोग आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया। वर्ष 1922 का चौरा-चौरी कांड भी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना रही। इसके बाद 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी यात्रा और नमक सत्याग्रह ने अंग्रेजी शासन के नमक कानून के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को मजबूत किया।

वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक चरण में पहुंचाया। ‘करो या मरो’ के आह्वान ने देशवासियों में नई ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का संचार किया।

डाक टिकटों में स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृतियां

इन ऐतिहासिक घटनाओं और आंदोलनों की स्मृतियों को संरक्षित रखने के लिए भारतीय डाक विभाग द्वारा समय-समय पर डाक टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए गए हैं। बालोद के वरिष्ठ डाक टिकट संग्राहक डॉ. प्रदीप जैन द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन ऐतिहासिक डाक टिकटों की प्रदर्शनी स्थानीय डाकघर में लगाई गई है।

प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के उन महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है, जिनमें अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों ने अपना योगदान दिया। यह संग्रह नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और देश की आजादी के लिए किए गए संघर्षों को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है।

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