गर्भ से ही संस्कार के बीज बोने गायत्री परिवार करवा रहा पुंसवन संस्कार, लोहारा में यहां हुआ आयोजन



डौंडीलोहारा। प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ गायत्री परिवार छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में ग्राम कमकापार में 17 बहनों का पुंसवन संस्कार संपन्न हुआ। गायत्री परिवार के द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भस्थ शिशु में देवत्व संचारित, दिव्य गुणों से सुशोभित करना और इस देश के भावी श्रेष्ठ नागरिक बनाना हैै .जिस प्रकार द्वापर में भगवान कृष्ण ने स्वयं सुभद्रा का पुंसवन संस्कार किया और अभिमन्यु का जन्म हुआ। अष्टावक्र समस्त वेदों के ज्ञाता थे। जब माता के गर्भ में थे तो उनका भी ऋषियों के द्वारा पुंसवन संस्कार से संस्कारित किया गया था।उसी प्रकार से राक्षस कुल में भक्त प्रहलाद जैसी संतान उत्पन्न हुई। जिसका कारण प्रह्लाद के मां के गर्भ में गर्भस्थ शिशु का पुंसवन संस्कार संपन्न किया गया। आज भी इसी तरह से संत, समाज सुधारक, ऋषि एवं देव तुल्य संतानों की आवश्यकता इस भारत भूमि को है जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए गायत्री परिवार का यह एक साधनात्मक कार्यक्रम गांव गांव संपन्न किए जा रहे हैं.इस कार्यक्रम को सफल बनाने में खेमिन झारिया, पूजा झारिया मोहन सिन्हा, त्रिलोक सिन्हा, शिवेन्द्र झारिया, तामेश्वरी सिन्हा, धनेश्वरी सिन्हा, रघुवीर खरे , धनाराम लाटिया, जगत खरे , भुनेश सिन्हा , राधेश्याम खरे , भूषण खरे ,लोकेश साहू, धन सिर, उर्वशी ,लक्ष्मी देशमुख, फुलवंती, करीमा, अनीता ,रामकली, ईश्वरी, मनीता, परमेश्वरी, सविता,सामन, लता महाबती, यशवंतीन, उदासा बाई, देवकी आदि का विशेष सहयोग रहा.

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