खनिज न्यास निधि में नहीं चलेगी मंत्रियों की मनमानी, केंद्र सरकार द्वारा कलेक्टर को अध्यक्ष बनाया जाएगा, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष ने किया निर्णय का स्वागत



बालोद। केंद्र सरकार द्वारा डीएमएफ यानी खनिज न्यास निधि के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेसी समर्थित भूपेश सरकार को एक पत्र भेजकर निर्देशित किया गया है कि वे प्रभारी मंत्रियों का अध्यक्ष प्रभार हटा दे। समिति के अध्यक्ष सिर्फ कलेक्टर ही होंगे। अलग से प्रभारी मंत्रियों को अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। मंत्रियों की अध्यक्षता समाप्त कर दी है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए भाजपा जिला महिला मोर्चा की अध्यक्ष दीपा दयानंद साहू ने कहा कि केंद्र समर्थित मोदी सरकार का बहुत अच्छा फैसला है। इसे खनिज न्यास निधि में भ्रष्टाचार, कमीशन खोरी रुकेगी। छत्तीसगढ़ में शिकायत आम हो गई थी कि इस डीएमएफ में मंत्री लाखों करोड़ों का वारा न्यारा कर रहे हैं। आर्थिक गड़बड़ी की शिकायतें प्राप्त हो रही थी। तो वहीं उनके आवंटन में भी बंदर बात हो रहा था। लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा स्पष्ट तय किया गया है कि उक्त फंड आवंटन के लिए अध्यक्ष सिर्फ कलेक्टर होंगे।

कोई मंत्री इसका अध्यक्ष नहीं होगा। बता दें कि बालोद जिला भी खनिज न्यास निधि के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्र में आता है। यहां दल्ली राजहरा क्षेत्र की खदानों से रॉयल्टी राजस्व का एक बड़ा जरिया है। जिससे करोड़ों की रॉयल्टी जिले को प्राप्त होती है। जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के चयनित प्रतिनिधियों को डीएमएफ के उद्देश्यों को प्रभावी बनाने के लिए देश के सभी प्रभावित क्षेत्र के डीएमएफ में शाषी परिषद के सदस्यों के रूप में जिले के प्रशासनिक प्रमुख अध्यक्ष रूप में कार्य करेंगे यह पहले से ही तय किया गया है। लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार के नियमों की अवहेलना करके छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा मंत्रियों को उक्त परिषद का अध्यक्ष बनाया जा रहा था। जिस पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष दीपा दयानंद साहू ने कहा कि विगत 2 जून को केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पत्र भी भेजा गया था कि डीएमएफ शासी परिषद के अध्यक्ष के रूप में जिले के प्रभारी मंत्रियों की अनुमति दी जाए। लेकिन इस पर भी केंद्र सरकार ने अपनी स्वीकृति नहीं दी ।क्योंकि केंद्र सरकार यानी भाजपा समर्थित मोदी सरकार को अच्छी तरह पता है कि कांग्रेसी सरकारी फंड का किस तरह से दुरुपयोग करती है। इसलिए उस फंड को जरूरतमंद क्षेत्र में खर्च करने के लिए एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी को अध्यक्ष बनाया जाना उचित समझा गया है और प्रभारी मंत्रियों के बजाय कलेक्टर पर भरोसा जताया गया। उम्मीद की जा रही है इससे डीएमएफ के आवंटन में गड़बड़ी नहीं होगी।

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