पर्यावरण असंतुलन के बढ़ते खतरे पर इस शख्स ने खुद की सांकेतिक अर्थी पौधों से सजा कर दिया संदेश- मेरे शरीर को जलाना नही दफनाया जाए, ताकि खाद बनकर किसी पौधे को नया जीवन दुं



बालोद/ दल्लीराजहरा। दल्ली राजहरा के ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह जो पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न तरीकों से काम करते रहते हैं। इन दिनों विश्व में बढ़ते पर्यावरण असंतुलन के घातक परिणामों को देखकर काफी चिंतित हैं और वे लोगों को संदेश दे रहे हैं कि अभी से सब सबक ले और पर्यावरण का संरक्षण करें। इसके लिए उन्होंने लोगों को एक मार्मिकता का संदेश देते हुए खुद की एक सांकेतिक अर्थी सजवाई और वहां पौधे रखवा कर कहा कि मेरा जब निधन हो तो मेरे शरीर को जलाया ना जाए, क्योंकि जलाने में भी लकड़ी का उपयोग होता है। लकड़ी के लिए पेड़ काटे जाते हैं।

इससे अच्छा है मुझे दफनाया जाए ताकि मेरा शरीर मिट्टी में दफन होकर खाद बनकर पौधों को एक नया जीवन देने के काम आए। उन्होंने कहा मेरा देश मेरा कर्तव्य ,हरियाली के लिये मेरा भी कुछ योगदान हो। एक ही इच्छा है कि मृत्यु के बाद शरीर को जलाना नही बस एक पौधा रोपित कर देना । धीरे धीरे वन का क्षेत्रफल कम होते जा रहे। देश ही नही विश्व के कई देशों में लाखों हेक्टेयर वन आग लगने से नष्ट हो रहे है। जिसका परिणाम कहीं सूखा, कहीं बारिश के रूप में सामने आ रही।धरती गर्म हो रही,जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण का असंतुलन हो जाना , लोगों की मृत्यु के बाद जलाने में देश में लाखों टन लकड़ियों की जरूरत पड़ रही है। मैं कुछ पेड़ो को बचा सकता हूं इसके लिए मरने के बाद मुझे जमीन में दफन कर दिया जाये। ताकी खाद बनकर फिर किसी पौधे में हरियाली ला सकू।

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