सोसाइटी में खाद की मारामारी, कम हो रही सप्लाई, किसान कर रहे हंगामा



बालोद

लगभग 15 से 20 दिनों बाद सोसाइटियों में खाद की सप्लाई धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। पर स्टाक मांग के अनुरूप नहीं आ रहा है इस वजह से सोसाइटी में खाद को लेकर किसानों के बीच मारामारी की स्थिति पैदा हो रही है। खाद की किल्लत दिन ब दिन बढ़ती जा रही है और सप्लाई ना होने से किसानों के बीच वाद-विवाद की स्थिति भी निर्मित होने लगी है। ऐसे ही हालात बुधवार को कई सोसाइटी में देखने को मिले। जहां खाद की रेक आई लेकिन पर्याप्त सप्लाई न होने से किसान आपस में झगड़ते रहे। तो वही प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया गया। कई सोसायटी में प्रबंधन पर चहेते किसानों यानी बड़े किसानों को उपकृत करने का आरोप भी लग रहा है। ऐसे में मध्यम व निम्न वर्ग किसान काफी परेशान हो रहे हैं। जो खाद के लिए सोसायटी के चक्कर काट रहे हैं। सांकरा ज सोसाइटी की बात करें तो यहां पर सिर्फ 700 बोरी डीएपी की सप्लाई हुई थी। लेकिन किसान कहीं ज्यादा थे। कई किसानों को खाद मिल ही नहीं पाया। सुबह से किसान खाद आने की जानकारी मिलने के बाद सोसायटी पहुंचे पर कई किसानों को खाद ही नहीं मिल पाया। इससे हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। सोसाइटी प्रबंधन पर्याप्त खाद की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। इस तरह के आरोप किसानों द्वारा लगाया गया। भीषम यादव ने बताया कई किसानों को बैरंग लौटना पड़ा क्योंकि 700 बोरी खाद अपर्याप्त थी। किसानों ने कहा कि सावन का महीना आ चुका है। बारिश भी धीरे-धीरे हो ही रही है। ऐसे में खाद की बहुत ज्यादा जरूरत है। अगर सोसाइटी में खाद नहीं मिला तो उन्हें निजी दुकानों से अधिक रेट पर खाद खरीदना पड़ेगा। काला बाजार की भी स्थिति निर्मित हो रही है। कई दुकानदार मुनाफाखोरी पर भी उतर आए हैं। खाद की रेट शासन के तय मुताबिक न लेकर निजी दुकानदार धीरे-धीरे बढ़ा भी रहे हैं। ऐसे में किसानों के लिए बहुत ही संकट का समय आ गया है। किसान द्वारा आरोप लगाया जा रग है कि राज्य व केंद्र दोनो सरकार गंभीर नहीं हैं। राज्य और केंद्र सरकार एक दूसरे पर खाद सप्लाई में अनियमितता का आरोप लगाकर जिम्मेदारी थोप रहे हैं।

समिति अध्यक्ष ने कहा मांग के अनुसार नहीं हो रही सप्लाई

सांकरा ज सोसाइटी के अध्यक्ष छगन देशमुख ने कहा कि हमने 105 टन खाद की मांग की थी लेकिन 30 टन की आपूर्ति हुई। वह भी पूरा नहीं आ रहा है यूरिया की सप्लाई नहीं हुई, डीएपी बस आया। जिन किसानों ने पहले से परमिट पर्ची कटवाई थी उन्हीं को ही वितरण हो पाया नए किसानों के लिए स्टाक ही नहीं बच पाया। इसलिए हंगामे की नौबत आई। किसानों को समझाया गया कि जितना आया है उतना ही दे पा रहे हैं। लगातार मांग की जा रही है। शासन प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। सभी किसानों को खाद चाहिए। खाद की बहुत ज्यादा दिक्कत है।

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