28 जुलाई को है विश्व वायरल हेपिटाइटिस दिवस, जानिये इसके बारे में विशेषज्ञ की कलम से



नोट- यह खबर हमारे लिए विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र गंजीर महामारी एवं पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट बालोद छत्तीसगढ़ ने लिखी है।

बालोद
वर्ष 2030 तक भारत से विषाणु जनित हेपेटाइटिस रोग की समाप्ति के लक्ष्य से 28 जुलाई 2018 से विश्व हेपेटाइटिस दिवस के रूप में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मनाया जाता है। जिसमें हेपेटाइटिस रोग के त्वरित पहचान बचाओ नियंत्रण उपचार के संबंध में विशेष प्रयास किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रत्येक वर्ष लगभग 14 लाख व्यक्तियों की मौत वायरल हेपेटाइटिस से संबंधित सिरोसिस और लिवर कैंसर से होती है।
लिवर में होने वाले संक्रमण अथवा अन्य कारणों से वायरल हेपिटाइटिस अर्थात लिवर में सूजन या यकृत शोथ की बीमारी होती है जिसे पीलिया रोग भी कहते है। अभी तक पांच प्रकार की हेपेटाइटिस की बीमारियां खोजी जा चुकी हैं जो ए बी सी डी और ई विषाणु के कारण होती हैं। हेपेटाइटिस ए और ई वायरस दूषित खाना और पानी से होती है। बी सी और डी संक्रमित रक्त और रक्त उत्पादों के के कारण होती है हेपेटाइटिस बी आरसी 90% मृत्यु का कारण है 10% मौतें अन्य वायरल हेपेटाइटिस के संक्रमण से होती है।

पीलिया के लक्षण– बुखार थकान भूख न लगना उल्टी पेट में दर्द मूत्र एवं मल में रंग परिवर्तन, जोड़ों में दर्द और शरीर, आंखो का पीलापन आदि पीलिया के लक्षण है।
शुद्ध और बिना तले हुए पदार्थों के सेवन, शुद्ध पेयजल से वायरल हेपिटाइटिस की और ए से बचा जा सकता है। वायरल हेपिटाइटिस ए और सी, डी से बचने के लिए सुरक्षित निखिल एवं सीरीज का उपयोग तथा सुरक्षित यौन संबंध के तरीके अपनाकर बचाव किया जा सकता है।
चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे मेडिकल तथा पैरामेडिकल स्टाफ को वायरल हेपेटाइटिस बी से बचने हेतु प्रोफाइलेक्टिक टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए जिसमें 0 दिवस 1 महीने पश्चात तथा 6 महीने के अंतराल में कुल 3 टीके लगा कर 20 से 25 साल तक के लिए सुरक्षा पाया जा सकता है। उसी प्रकार बच्चों को जन्म के समय लगने वाला हेपेटाइटिस बी टीकाकरण आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है। सभी प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के रोकथाम बचाव व उपचार हेतु भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है जिसमें रोग के त्वरित पहचान उपचार बचाओ तथा नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय चिकित्सालयों में उक्त जांच व उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। हमेशा नए निडिल व सीरीज के इस्तेमाल, सेविंग करते समय हमेशा हमेशा नए रेजर ब्लेड के उपयोग तथा संयमित जीवन, टीकाकरण अपना कर वायरल हेपिटाइटिस संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।

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