बालोद में भी पेट्रोल 100 के पार,चौतरफा मूल्य वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस की साईकिल यात्रा आज



बालोद। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी बालोद द्वारा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की बढ़ती कीमतों व चौतरफा मूल्य वृद्धि के खिलाफ एक मजबूत विरोध दर्ज कराने के लिए 14 जुलाई, बुधवार को प्रातः 11 बजे झलमला से दल्ली चौक होते हुए कांग्रेस भवन तक साइकल यात्रा आयोजित की जाएगी। साईकिल यात्रा का नेतृत्व जिलाध्यक्ष चंद्रप्रभा सुधाकर करेगी। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री केशव शर्मा ने बताया कि सभी जिला संगठन के पदाधिकारी, वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता, विधायक, पूर्व विधायक, जिला, जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, नगर पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष, प्रदेश, जिला, ब्लॉक संगठन पदाधिकारी, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, किसान कांग्रेस, विधि प्रकोष्ठ, व्यापार प्रकोष्ठ, मजदूर कांग्रेस, मछुआ कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस, किसान कांग्रेस, आदिवासी कांग्रेस, अनुसूचित जाति कांग्रेस, झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ पदाधिकारी, समस्त नगर पालिक निगम/नगर पंचायत पार्षद, एल्डरमेन, समस्त ग्राम पंचायत सरपंच, पंच एवं सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधि सहित समस्त कांग्रेसजनों की उपस्थिति की अपील की है।

बालोद में पेट्रोल के दाम पहली बार पहुंचा 100 और ₹103 पर, जनता ने कहा महंगाई अब और होगी हावी

बालोद। जिले में पहली बार पेट्रोल के दाम ₹100 पार हो गए नॉर्मल पेट्रोल ₹100 और पावर पेट्रोल ₹103 प्रति लीटर हो गया। इससे जनता में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अब महंगाई हम पर और हावी होगी। सरकार का क्या है वह तो महंगाई पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। भुगतना जनता को पड़ रहा है। जब लोग आज पेट्रोल पंप में पेट्रोल डलवाने के लिए पहुंचे तो रेट लिस्ट देखकर दंग रह गए।। कभी 93 से 97 तक रेट नजर आता था लेकिन आज सीधे ₹100 रेट हो गए। दिन-ब-दिन बढ़ते पेट्रोल डीजल के दाम ने लोगों की नींद उड़ा रखी है।

केंद्र सरकार है दोषी

इस दौरान मौजूद साजन पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार ईंधन के दाम पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। इस पर नियंत्रण जरूरी है। वरना लोगों की सर्वाधिक कमाई पेट्रोल डीजल में ही खत्म जाएगी और वे अपने लिए कुछ बचा भी नहीं पाएंगे। खासतौर से रोजाना गाड़ियों से ही परिवहन करने वाले लोगों को इन दिनों गाड़ी की सवारी भी महंगी पड़ रही है।

हो गई है दुपहिया की आदत

पंप आई एक महिला ने बताया कि गाड़ी से ही कहीं आने जाने की आदत हो गई है। अब पहले की तरह पैदल या साइकिल से चला नहीं जाता। अगर बाजार या कहीं दुकान पर जाना है तो गाड़ी से ही जाना पड़ता है। यह आदत एकाएक छूट भी नहीं सकती इसलिए मजबूरी में जितना रेट हो उतना पेट्रोल डलाना पड़ता है। पर सरकार को भी सोचना चाहिए कि कैसे इस पर नियंत्रण हो क्योंकि पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम से महंगाई फिर चरम पर पहुंचेगी।

निम्न और मध्यम वर्ग तो लूट जाएगा

पंप में आए एक ग्रामीण ने कहा कि अगर इसी तरह ईंधन के दाम बढ़ते रहे तो निम्न और मध्यम वर्ग तो लूटने से ही रह गया। उनकी आधी से ज्यादा कमाई तो इसी में चली जाएगी। क्योंकि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ना सिर्फ उसी का दाम बढ़ना नहीं है बल्कि इससे हर चीज के दाम में वृद्धि होगी। पेट्रोल डीजल के दाम से ट्रांसपोर्टिंग टिका हुआ है और ट्रांसपोर्टिंग से पूरा व्यापार और व्यापार से लोगों का जनजीवन। जो चीजें हम तक पहुंचती है उनमें ट्रांसपोर्टिंग खर्च भी जुड़ा रहता है। ट्रांसपोर्ट खर्च पेट्रोल के बढ़ते दाम के साथ भी बढ़ जाता है और महंगाई इस कदर धीरे-धीरे बढ़ती है कि उसे झेलना आम जनता के लिए नामुमकिन हो रहा है।

पंप में पानी और हवा तक का इंतजाम नहीं

वहीं दूसरी ओर जनता में इस बात पर भी नाराजगी है कि पेट्रोल पंप में मनमाने रेट पर तो इंधन बेचा जा रहा है पर जो मूलभूत सुविधा पंप में ग्राहकों को दी जानी चाहिए वह तक भी उन्हें नसीब नहीं हो रहा है। शासन का नियम है कि यहां आने वाले ग्राहकों के लिए पीने के पानी का इंतजाम हो। गाड़ियों में निशुल्क हवा भरने का इंतजाम हो लेकिन अधिकतर पंप में या तो हवा मशीन खराब पड़ी है या कर्मचारी नहीं होने का बहाना बनाकर पंप संचालक हवा डालने से बचते हैं। नतीजा ग्राहकों को हवा के लिए दूसरी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है।

इधर ‘तेल कंपनियों ने भारत में पेट्रोल-डीजल के भाव तब बढ़ाने शुरू किए जब कच्चा तेल काफी नीचे 19 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था. तो अब कच्चे तेल का रेट बढ़ रहा है. ब्रेंट क्रूड 40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है.
तेल कंपनियों के पास जो इन्वेंट्री है उसमें भी उन्हें नुकसान हो रहा है. मांग कम हो गई है और उनके मार्जिन माइनस में आ गए हैं. तो वे इस नुकसान की भरपाई अपना मार्जिन बढ़ाकर करेंगी. एक्साइज ड्यूटी में सरकार ने करीब 13 रुपये तक की बढ़त कर दी है. इसका भी पूरा बोझ अभी ग्राहकों पर नहीं डाला गया है. ऐसे में स्वाभाविक है कि आगे रेट और बढ़ाने पड़ेंगे. यही गति जारी रही तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के बाद अब आगे का ग्राफ को भी पार कर जाए।

अभी और बढ़ेगी कीमत

डीजल-पेट्रोल की कीमतें अभी और बढ़ने के ही पूरे आसार हैं. अभी तेल कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं. इसके बाद राज्य सरकारें इस पर वैट बढ़ाएंगी. लॉकडाउन की वजह से राज्यों की इकोनॉमी की हालत खराब ही है. कई राज्य एक बार डीजल पर वैट बढ़ा चुके हैं. वे अब फिर मौके की तलाश में हैं कि कब पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाने का मौका मिले.

ये है दाम बढ़ाने की क्रोनोलॉजी

पहले केंद्र सरकार ने इस पर लगातार टैक्स बढ़ाया, अब तेल कंपनियां दाम बढ़ाकर अपना बहीखाता ठीक कर रही हैं और आगे राज्य सरकारें टैक्स बढ़ाकर अपना राजस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगी. यानी तेल को सरकारों ने टैक्स के मामले में दुधारू गाय समझ लिया है. इस सबका पूरा बोझ जनता पर जाएगा.

ऐसा तभी नहीं होगा कि जब सरकार कोई विशेष कदम उठाकर इसे रोकने की कोशिश करे, लेकिन यह राहत भी लग रहा कि कई राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले नहीं मिलने वाली है.

राज्यों की कीमत में क्यों है अंतर

इंडियन ऑयल के मुताबिक पेट्रोल की बेस प्राइस जहां 22.11 रुपये प्रति लीटर है, वहीं डीजल की बेस प्राइस 22.93 रुपये प्रति लीटर है. यानी डीजल की लागत थोड़ी ज्यादा ही है. जिस राज्य में डीजल पर टैक्स ज्यादा है, वहां अब डीजल का रेट ज्यादा हो गया है. यूपी जैसे कृषि प्रधान राज्यों में अभी डीजल पर वैट कम है, इसलिए वहां अभी डीजल का रेट कम है. छग में भी अब पेट्रोल 100 पार हो गया।

आने वाले दिनों पड़ेगा इस तरह असर
पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई की ओर बढ़ने की वजह से अगले दिनों में महंगाई का तगड़ा झटका जनता को लगने वाला है. खासकर डीजल का रेट बढ़ना ज्यादा नुकसानदेह है. भारत में डीजल का इस्तेमाल कृषि, ट्रांसपोर्ट जैसे जरूरी काम में किया जाता है.
डीजल के रेट बढ़ने से कृषि पैदावार के रेट बढ़ेंगे और तमाम सामान की ढुलाई भी बढ़ जाएगी. ट्रकों का भाड़ा बढ़ जाएगा. इसकी वजह से महंगाई बढ़ने के पूरे आसार हैं.

You cannot copy content of this page