माउंट एवरेस्ट को फतह करने निकली बस्तर की ये बेटी नैना धाकड़, जानिए इस बेटी के बारे में जिसे लोग कहते हैं माउन्टेन गर्ल



जगदलपुर -कुछ ही दिनों में बस्तर का परचम दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउण्ट एवरेस्ट में लहराने वाला है। पर्वतारोहण के जरिए लगातार बस्तर का मान बढ़ाने वाली बस्तर की बेटी नैना धाकड़ एक बार फिर से माउण्ट एवरेस्ट में बस्तर का परचम लहराकर रिकार्ड बनाने की तैयारी में है। नैना धाकड़ माउण्ट एवरेस्ट पहुंचने पर वह बस्तर की ऐसी पहली शख्सियत बन जाएंगी, जिसने यह कारनामा किया है।
विगत दिनों कलेक्टर रजत बंसल और पुलिस अधीक्षक दीपक झा ने नैना सिंह धाकड़ को माउण्ट एवरेस्ट के लिए रवाना होने के पूर्व अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। एनएमडीसी के नगरनार इस्पात एवं लौह संयंत्र के अधिशाषी निदेशक श्री प्रशांत दास भी इस अवसर पर उपस्थित थे। बस्तर जिला प्रशासन और एनएमडीसी के सहयोग से माउण्ट एवरेस्ट को फतह करने निकली नैना सिंह धाकड़ ने इस अवसर जिला प्रशासन और एनएमडीसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उनका यह अभियान लगभग 60 दिनों का होगा।

नैना जानी जाती है माउन्टेन गर्ल के नाम से

उसे बचपन से ही पहाड़ों की चोटियां आकर्षित करती थीं। थोड़ी बड़ी हुई तो कराटे सीखने लगी। इसमें तीन बार नेशनल भी खेला। फिर पर्वतारोहण से लगाव हुआ और आज उसके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। बस्तर (Bastar) जैसे नक्सलग्रस्त और आदिवासी बाहुल्य इलाके की इस लड़की ने साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल कायम की है। नैना सिंह धाकड़ आज किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं, माउंटेन गर्ल के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की नैना राज्य की पहली महिला हैं जिन्होंने किसी पर्वत की चढ़ाई पूरी की है। नैना ने 6,512 मीटर ‘भागीरथी 2’ को फतह कर नया कीर्तिमान बनाया है। भागीरथी-2 हिमालय की सबसे अधिक बर्फीली पहाड़ियों में से एक है, जो उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में है। पुलिस पिता की यह बिटिया जिगर के मामले में पुरुषों को भी मात देती है। इस चढ़ाई के जरिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया। ‘सेव हिमालय’ के मैसेज के साथ उन्होंने यह चढ़ाई की थी।

ये है पारिवारिक परिचय

मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली नैना के पिता पुलिस में थे। उनका देहांत हो चुका है। दो भाई हैं, जो परिवार संभालते हैं। स्कूल के दिनों में नैना कराटे की खिलाड़ी थीं। तब सोचा नहीं था कि कभी पर्वतारोहण के क्षेत्र में जाएंगी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 2010 में एनएसएस की ओर से उन्हें पर्वतारोहण पर कैम्प करवाने का मौका मिला था। हिमाचल प्रदेश में लगे इस ट्रेनिंग-कैम्प के दौरान उन्होंने देश के नामी पर्वतारोहियों से माउंटेनीयरिंग, रॉक-क्लाइम्बिंग और रिवर-क्रॉसिंग के बारे में जाना। यह नैना के लिए टर्निंग प्वाइंट था। उसके बाद पर्वतारोहण का जो जुनून पैदा हुआ तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पढ़ाई खत्म होने के बाद 2011 में नैना जॉब के सिलसिले में जमशेदपुर गई हुई थीं। संयोग से वहां उनकी मुलाकात माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली देश की पहली महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल से हुई। बस्तर (Bastar) का नाम सुनते ही बछेंद्री उनसे प्रभावित हुईं और उन्हें एक महीने की ट्रेनिंग पर चलने को कहा। नैना ने फौरन हां कर दी। फिर क्या था देश के अलग-अलग राज्यों से 11 महिलाओं के साथ उन्हें एक महीने के लिए भूटान ले जाया गया।

इस यात्रा को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में जगह मिली थी। श्रीमती पाल की सलाह पर नैना ने वर्ष 2012 में दार्जिलिंग स्थित हिमालय पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण का कोर्स किया। साथ ही एएमसी, एचएमआई, एनआईएम, बेसिक एडवांस रॉक क्लाइम्बिंग कोर्स भी पूरा किया। कोर्स पूरा करने के बाद दार्जिलिंग की पहाड़ी की चढ़ाई पूरी करने में सफल हुईं।

नैना के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए आईजी बस्तर विवेकानंद सिन्हा और एसपी आरिफ शेख ने काफी मदद की। नैना 26 अगस्त, 2017 को चढ़ाई के लिए रवाना हुई थीं और 19 सितम्बर, 2017 को उन्होंने भागीरथी-2 फतह कर वहां बस्तर पुलिस और भारत का राष्ट्रीय धवज फहराया। जब नैना ने हिमाचल प्रदेश में भागीरथी-2 की चढ़ाई शुरू की थी तब बस्तर एसपी आरिफ शेख ने उन्हें तिरंगा और बस्तर पुलिस का झंडा सौंपा था। इस उपलब्धि के बाद राज्य की एकमात्र पर्वतारोही नैना को बस्तर पुलिस ने 2017 में अपना एम्बेसडर बनाया।

उन्होंने कहा कि मैंने इस चर्चित पहाड़ी की चढ़ाई कर ली, पर मेरा लक्ष्य माउंट एवरेस्ट है। इसके लिए मैं राज्य के खेल-विभाग और पुलिस अधिकारियों का शुक्रिया अदा करती हूं। बस्तर पुलिस ने कहा है कि वह आगे भी नैना को सपोर्ट करते रहेंगे और हर संभव मदद के लिए तैयार रहेंगे। इससे पहले वह नेपाल और भूटान में भी पर्वतारोहण कर चुकी हैं। बस्तर की इस बेटी की उड़ान को सलाम,,, नैना का लक्ष्य माउंट एवरेस्ट है अब वह मंजिल की ओर निकल पड़ी है

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