बालोद, 29 जून 2026।
सरस्वती शिशु मंदिर माध्यमिक विद्यालय, बालोद में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के सफल संचालन एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखते हुए प्रथम आचार्य आवर्ती वर्ग बैठक का आयोजन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। बैठक का उद्देश्य आचार्यों को विद्यालय की वार्षिक कार्ययोजना, आधुनिक शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं आगामी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित एवं मार्गदर्शित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना एवं प्रेरक गीत की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत कर दिया।
आचार्य ही विद्यालय की वास्तविक पहचान — प्राचार्य
बैठक को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय की पहचान केवल भवन से नहीं बल्कि उसके आचार्यों के व्यक्तित्व, शिक्षण कौशल एवं संस्कारयुक्त व्यवहार से बनती है। उन्होंने कहा—
“एक आचार्य केवल विषय नहीं पढ़ाता, बल्कि अपने आचरण से विद्यार्थियों के जीवन का निर्माण करता है।”
उन्होंने सभी आचार्यों से समयबद्धता, अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नवाचार और प्रत्येक विद्यार्थी पर व्यक्तिगत ध्यान देने का आह्वान किया।
अभिभावक संपर्क और संस्कार शिक्षा पर विशेष मार्गदर्शन
बैठक में राजनांदगांव विभाग के विभाग समन्वयक श्री दीपक यादव ने अभिभावक संपर्क विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि विद्यालय और परिवार के बीच निरंतर संवाद विद्यार्थियों के बेहतर विकास का आधार है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि अभिभावक संपर्क क्यों आवश्यक है, किस प्रकार किया जाना चाहिए और इसके माध्यम से विद्यार्थियों के व्यवहार, अध्ययन और व्यक्तित्व विकास में सकारात्मक परिवर्तन कैसे लाया जा सकता है।
शिक्षण को रोचक और परिणामोन्मुख बनाने पर चर्चा
बैठक में दैनिक शिक्षण योजना, वार्षिक एवं मासिक पाठ्यक्रम विभाजन, गतिविधि आधारित शिक्षण, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, गृहकार्य व्यवस्था, कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहयोग, मेधावी छात्रों के प्रोत्साहन, परीक्षा संचालन और परिणाम सुधार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सह-शैक्षणिक गतिविधियों की भी बनी रूपरेखा
विद्यालय में संचालित होने वाली विज्ञान प्रदर्शनी, गणित गतिविधियां, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुस्तक वाचन, भाषण, वाद-विवाद, चित्रकला, पर्यावरण संरक्षण अभियान, सेवा कार्य और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना भी प्रस्तुत की गई।
इसके साथ ही विद्यालय की दैनिक प्रार्थना, योगाभ्यास, नैतिक शिक्षा, प्रेरक प्रसंग, देशभक्ति गीत, भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
राष्ट्र निर्माण और संस्कारयुक्त शिक्षा का लिया संकल्प
बैठक के दौरान आचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। अंत में सभी आचार्यों ने भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा देने, विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने तथा विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र, वंदे मातरम् एवं भारत माता की जय के उद्घोष के साथ किया गया।








