देवलाल ठाकुर और विकास मरकाम की टिप्पणी पर जताया विरोध, सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बयान वापस लेने की मांग
दल्लीराजहरा। विश्व आदिवासी दिवस को लेकर भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर एवं अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के विकास मरकाम द्वारा की गई टिप्पणी पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, दल्लीराजहरा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को ‘विदेशी अवधारणा’ बताकर आदिवासी समाज के संघर्ष, अधिकार और वैश्विक एकजुटता को नकारने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। संगठन के अनुसार 9 अगस्त आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान, जल-जंगल-जमीन, संस्कृति, भाषा और अस्तित्व से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
आदिवासी वीरों के संघर्ष को याद किया
पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने कहा कि भारत का आदिवासी समाज सदियों से अपनी जमीन, जंगल, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है। बिरसा मुंडा, शहीद गुंडाधुर सहित अनेक आदिवासी वीरों ने शोषण और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस को विदेशी बताना आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष और बलिदानों को कमतर आंकने जैसा है।
राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासी भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा कि आदिवासी समाज के बीच जाकर नेता वोट, समर्थन और सम्मान मांगते हैं, लेकिन उसी समाज के गौरव से जुड़े अवसर पर इस तरह की टिप्पणी किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि समाज को यह आत्ममंथन भी करना चाहिए कि क्या राजनीतिक या निजी स्वार्थ के लिए ऐसे लोगों को सामाजिक मंच और सम्मान देते रहना उचित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ अथवा अपने राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के लिए आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर बयानबाजी करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने इतिहास, संस्कृति और अधिकारों के प्रति जागरूक है तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना जानता है।
सार्वजनिक स्पष्टीकरण और टिप्पणी वापस लेने की मांग
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने मांग की है कि इस प्रकार की टिप्पणी करने वालों को आदिवासी समाज की भावनाओं के प्रति सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए तथा आपत्तिजनक टिप्पणी वापस लेनी चाहिए।
संगठन ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और अस्मिता का प्रतीक है। जल-जंगल-जमीन, संस्कृति और आदिवासी स्वाभिमान से जुड़े मुद्दों पर समाज अपनी आवाज मजबूती से उठाता रहेगा।












