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अंधविश्वास के विरुद्ध वैज्ञानिक सोच अपनाना समय की आवश्यकता : डॉ. दिनेश मिश्र

बालोद। वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा है कि अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव के कारण आज भी देश में हजारों निर्दोष लोग शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं को डायन या टोनही होने के संदेह में अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं तथा कई मामलों में उनकी हत्या तक कर दी जाती है, जो एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में अंधविश्वास के विरुद्ध वैज्ञानिक सोच अपनाने का संदेश देकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक विषय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाया है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि अंधविश्वास केवल एक गलत धारणा नहीं, बल्कि ऐसा भय है जो व्यक्ति को तर्क, विवेक और सत्य से दूर कर देता है।

उन्होंने बताया कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति पिछले तीन दशकों से अंधविश्वास, टोनही प्रथा और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रही है। इस दौरान हजारों महिलाओं को डायन-टोनही के आरोपों के कारण होने वाली प्रताड़ना से बचाया गया है। समिति पीड़ित महिलाओं के उपचार, पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना के लिए भी लगातार कार्य कर रही है।

डॉ. मिश्र ने प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय पर ध्यान दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अंधविश्वास उन्मूलन के प्रयासों को नई गति मिलेगी और समाज में वैज्ञानिक चेतना का विस्तार होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अंधविश्वास, डायन-टोनही जैसी कुप्रथाओं तथा इनके नाम पर होने वाली हिंसा और प्रताड़ना को रोकने के लिए पूरे देश में एक प्रभावी और सशक्त राष्ट्रीय कानून बनाया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों को न्याय एवं सुरक्षा मिल सके।

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