डॉ. दिनेश मिश्र ने संवाद, व्याख्यान, स्वास्थ्य शिविर और वैज्ञानिक सोच के माध्यम से चलाया जागरूकता अभियान

बालोद/बस्तर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में अंधविश्वास, जादू-टोना, टोनही प्रताड़ना तथा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध लंबे समय से लगातार जनजागरण अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का प्रमुख संदेश रहा है— “कोई नारी टोनही नहीं होती, अंधविश्वास नहीं वैज्ञानिक सोच अपनाएँ।”
इस अभियान से जुड़े डॉ. दिनेश मिश्र द्वारा पिछले तीन दशकों से अधिक समय से बस्तर संभाग एवं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रामीणों के बीच पहुंचकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को कथित चमत्कारों, जादू-टोना और टोनही जैसी धारणाओं की वास्तविकता से परिचित कराना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा।
अभियान के अंतर्गत कोरर, भानुप्रतापपुर, कोंडागांव, फरसगांव, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, जगदलपुर, चित्रकूट सहित अनेक क्षेत्रों में सभाएं, कार्यशालाएं, व्याख्यान और जनसंवाद आयोजित किए गए। कई मामलों में प्रशासन के आमंत्रण पर घटनास्थलों का दौरा कर ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित किया गया तथा सामाजिक तनाव को कम करने का प्रयास किया गया।
कांकेर जिले के पुसावंड में स्कूली बच्चों के बीच फैले अंधविश्वास से जुड़े मामले में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य परीक्षण आयोजित किए गए। वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के राज्य स्तरीय शिविरों में युवाओं को वैज्ञानिक सोच और सामाजिक चेतना पर व्याख्यान दिए गए।
नारायणपुर जिले के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के ओरछा में सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों के साथ स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी आयोजित किए गए। वहीं आमदेई घाटी शिविर में सुरक्षा बलों के जवानों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुए।
अभियान के दौरान शासकीय गुंडाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोंडागांव, शासकीय भानुप्रताप देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को सामाजिक कुरीतियों, वैज्ञानिक सोच और समाज सुधार के विषय पर संबोधित किया गया तथा पुस्तकों का वितरण किया गया।
वर्ष 2001 से 2026 तक विभिन्न जिलों में जादू-टोना, टोनही प्रताड़ना और अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं के बाद मौके पर पहुंचकर जनसंवाद, समझाइश, व्याख्यान और जागरूकता अभियान संचालित किए गए। अनेक गांवों में ग्रामीणों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बीमारी, दुर्घटना या सामाजिक समस्याओं का समाधान अंधविश्वास नहीं बल्कि वैज्ञानिक समझ, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सहयोग में निहित है।
अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि समाज में जागरूकता, शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही ऐसी कुरीतियों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
अभियान का संदेश:
“कोई नारी टोनही नहीं होती; अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक सोच अपनाएँ।”












