
बालोद। जय सेवा, जय जोहार के उद्घोष के साथ शनिवार 20 जून 2026 को तुएगोंदी जमहा पाट में आयोजित तुएगोंदी जमहा डोकरा राऊड संरक्षण जतरा में आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे समाजजन, माताएं-बहनें एवं युवा साथी आंगा पेन के दर्शन, पेन पुरखाओं का आशीर्वाद और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े धार्मिक आयोजनों में सहभागी बने।
इधर आयोजन को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया और पूरे क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

आस्था, परंपरा और पुरखा संस्कृति का संगम
सुबह से ही जतरा स्थल पर श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रहीं और समाजजन इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं पुरखा परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं। आयोजन के दौरान आगा देव के आगमन की जानकारी भी सामने आई, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का वातावरण देखा गया।
पूर्व चेतावनी के चलते प्रशासन अलर्ट मोड पर
ज्ञात हो कि विगत दिनों आदिवासी समाज के कुछ प्रतिनिधियों द्वारा कलेक्टर कार्यालय घेराव के दौरान 20 जून को पाटेश्वर धाम के घेराव की चेतावनी भी दी गई थी।
इस दौरान आरोप लगाए गए थे कि पाटेश्वर धाम क्षेत्र में संत बाबा बालक दास द्वारा लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में अवैध कब्जा कर सरकारी राशि से निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत की गई है। हालांकि तीन दिन पूर्व सीएम के साथ बैठक में घेराव नहीं करने को लेकर सहमति बनी है।

अतिक्रमण कार्रवाई और चौकस प्रशासन
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा पिछले तीन दिनों से कथित अतिक्रमण से जुड़े मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। इसी संवेदनशील स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है।
सुबह से ही कलेक्टर दिव्या मिश्रा, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। चारों दिशाओं से गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पाटेश्वर धाम क्षेत्र और आसपास के मार्गों पर पुलिस बल तैनात है तथा प्रमुख रास्तों पर नाकेबंदी की गई है।
करीब 20 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
डांग-डोरी यात्रा के दौरान मधुमक्खियों का हमला, कई श्रद्धालु प्रभावित

जात्रा के दौरान जब श्रद्धालु डांग-डोरी और अंगा देव के साथ जंगल के रास्ते जामडी पाट की ओर बढ़ रहे थे, उसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों को मधुमक्खियों ने काटा और लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर हटकर स्वयं को बचाने का प्रयास किया।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि परंपरागत मान्यता के अनुसार महिलाओं को मूल स्थान तक नहीं जाना था और कुछ लोगों ने इस घटना को धार्मिक आस्था एवं दैवीय संकेत से जोड़कर देखा। हालांकि यह स्थानीय मान्यता और श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत धार्मिक व्याख्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
हमले के बाद कई महिलाएं वापस लौटती दिखाई दीं, जबकि कुछ श्रद्धालु वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
इतनी बड़ी भीड़ और अचानक हुई इस घटना के बीच मौके पर स्वास्थ्य अमले की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा रही। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
वीडियो और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध, स्थिति नियंत्रण में

जतरा स्थल पर आयोजन की पवित्रता एवं व्यवस्थागत कारणों को देखते हुए वीडियो एवं फोटोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध रखा गया है। आयोजन समिति और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं से नियमों के पालन और सहयोग की अपील की गई है।
समाचार लिखे जाने तक किसी प्रकार की घेराव या तनावपूर्ण घटना की सूचना नहीं मिली है। बड़ी संख्या में पहुंचे आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक जात्रा उत्सव, आस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागी बने हुए हैं तथा आयोजन शांतिपूर्ण रूप से जारी है।
प्रशासन और आयोजन से जुड़े पक्षों ने सभी से शांति, अनुशासन एवं परंपरागत मर्यादाओं का पालन करने की अपील की है।
मधुमक्खियों के हमले के दौरान कुछ देर अफरा-तफरी, अतिथियों को भी सुरक्षित स्थान लेना पड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जतरा के दौरान जब डांग-डोरी और अंगा देव के साथ श्रद्धालु जंगल मार्ग से जामडी पाट की ओर बढ़ रहे थे, उसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड के हमले से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कई लोगों को मौके से हटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा तथा कई श्रद्धालुओं को मधुमक्खियों ने काटा भी।

आयोजन स्थल पर मौजूद विशिष्ट अतिथियों को भी एहतियातन स्वयं को सुरक्षित करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निज सहायक श्री कौशिक ने भी मधुमक्खियों से बचाव के लिए जैकेट ओढ़कर सुरक्षित रहने का प्रयास किया। वहीं नगर पंचायत डौंडीलोहारा के अध्यक्ष लाल निवेंद्र सिंह टेकाम भी उस समय पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे हुए थे और उन्हें भी सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा।
घटना के बाद कुछ समय तक लोगों में हलचल रही, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होती दिखाई दी और धार्मिक आयोजन क्रमशः आगे बढ़ता रहा। समाचार लिखे जाने तक किसी गंभीर जनहानि की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई थी।










