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श्रावण मास में डौंडी में गूंजेगी भक्ति की रसधारा, तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ 8 अगस्त से

श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री नरेन्द्राचार्य जी की प्रेरणा से होगा भव्य आध्यात्मिक आयोजन, प्रतिदिन कथा, रासलीला, महाआरती और महाप्रसादी का मिलेगा लाभ

डौंडी,विक्की जायसवाल। पवित्र श्रावण मास के शुभ अवसर पर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से नगर पंचायत सांस्कृतिक भवन, डौंडी में 8, 9 एवं 10 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय भव्य ‘श्रीकथा ज्ञान यज्ञ’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री नरेन्द्राचार्य जी की दिव्य प्रेरणा एवं आशीर्वाद से स्वरूप संप्रदाय भक्त सेवा मंडल, बालोद-कांकेर द्वारा किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से कार्यक्रम प्रारंभ होगा, जिसमें सुप्रसिद्ध प्रवचनकार श्री ज्ञानेश्वर जाधव जी श्रीकथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और सनातन संस्कृति के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराएंगे।

8 अगस्त को निकलेगी भव्य शोभायात्रा, होगा शुभारंभ

आध्यात्मिक महोत्सव के प्रथम दिवस 8 अगस्त (शनिवार) को सुबह 11 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात श्री सिद्ध चरणपादुका एवं पवित्र ग्रंथ स्थापना, कलश स्थापना, पूजन एवं आरती का आयोजन होगा। इसके बाद श्रीकथा का प्रथम सत्र प्रारंभ होगा, जिसमें अठारह पुराणों के सारगर्भित प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को दिव्य रासलीला का भी दर्शन कराया जाएगा। सायंकाल राधा-कृष्ण महाआरती होगी, जिसमें श्रद्धालु अपने घरों से आरती थाल लाकर स्वयं आरती करने का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे। आरती के पश्चात जगद्गुरुश्री की सिद्ध पादुका के दर्शन तथा महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा।

दूसरे दिन कथा और रासलीला का होगा दिव्य संगम

9 अगस्त (रविवार) को कार्यक्रम की शुरुआत श्री सिद्ध चरणपादुका, ग्रंथ एवं कलश पूजन से होगी। इसके बाद श्रीकथा का द्वितीय सत्र और दिव्य रासलीला का आयोजन किया जाएगा। शाम को भव्य महाआरती के बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा।

समापन दिवस पर उपासक दीक्षा एवं विशेष आध्यात्मिक मार्गदर्शन

10 अगस्त (सोमवार) को समापन दिवस पर श्रद्धालुओं के लिए श्रीक्षेत्र नानीजधाम दर्शन, उपासना विधि का मार्गदर्शन, संतों के प्रेरक उपदेश तथा 7 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए उपासक दीक्षा एवं उपासना विधि संस्कार का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ श्रीकथा का अंतिम सत्र, दिव्य रासलीला, महाआरती, कथा पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी वितरण के साथ महोत्सव का समापन होगा।

श्रद्धालुओं से सपरिवार सहभागिता की अपील

आयोजक समिति ने डौंडी सहित आसपास के नगरों एवं ग्रामों के सभी श्रद्धालुओं से इस भव्य आध्यात्मिक महोत्सव में सपरिवार शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि श्रीकथा श्रवण, भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना के इस पावन अवसर का लाभ उठाकर श्रद्धालु अपने जीवन को धर्म, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा से समृद्ध बना सकते हैं।

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