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खाद की मांग पर आंदोलन करने वाले किसानों पर केस, 9 महीने से कोर्ट के चक्कर; बोले– “खाद मांगी थी, भीख नहीं”

करहीभदर में खाद संकट को लेकर हुए चक्का जाम के मामले में 15 किसान अब भी न्यायालय की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं

बालोद। कुछ महीने पहले बालोद जिले के करहीभदर क्षेत्र में खाद की भारी किल्लत से परेशान किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर चक्का जाम कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप था कि समय पर यूरिया और डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होने से उनकी फसल प्रभावित हो रही थी। कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर किसानों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ा।

आंदोलन के बाद 15 किसानों पर दर्ज हुआ मामला

चक्का जाम के बाद जनपद सदस्य लोकेश डड़सेना सहित 15 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पिछले लगभग 9 महीनों से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और किसानों को लगातार कोर्ट में पेशी के लिए जाना पड़ रहा है।

मामले में नामजद किसानों में तुलसी राम साहू, तुलाराम सिन्हा, शंकर लाल साहू, संतोष कुमार, जसवंत सिन्हा, डायमंड साहू, पूरण यादव, भारत सिन्हा, कार्तिक राम सिन्हा, लोकनाथ साहू सहित कुल 15 किसान शामिल हैं।

लोकेश डड़सेना बोले – “खाद मांगी थी, भीख नहीं”

जनपद सदस्य लोकेश डड़सेना ने कहा कि किसानों ने केवल अपनी फसलों को बचाने के लिए खाद की मांग की थी, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय उन पर प्रकरण दर्ज कर दिया गया।

उन्होंने कहा,

“हमने खाद मांगी थी, भीख नहीं। सरकार सो रही थी, इसलिए सड़क पर उतरना पड़ा। इसके बाद हम पर केस दर्ज कर दिया गया। पिछले 9 महीने से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। यह किसानों की आवाज दबाने की साजिश है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। सच की जीत जरूर होगी।”

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

लोकेश डड़सेना ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा,

“आज भी कई कृषि केंद्रों में दुकानदार यूरिया और डीएपी खाद को मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। अधिकारी सुध लेने वाले नहीं हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि ऊपर बैठी भाजपा सरकार सो रही है और 2028 के चुनाव का इंतजार कर रही है। लेकिन आम जनता और किसान चुप नहीं बैठेगा। इस बार सबक सिखाएगा। चक्का जाम में साथ देने वाले हर किसान भाई का आभार। अगर आगे भी किसानों को परेशान किया गया तो ये 15 नहीं, 15 हजार किसान फिर सड़क पर उतरेंगे। हम एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे।”

जमानत में मिला सामाजिक सहयोग

लोकेश डड़सेना ने बताया कि आंदोलन के बाद कानूनी प्रक्रिया के दौरान ग्राम लिमोरा के ग्राम पटेल श्री चिंता देहारी ने सभी किसानों की जमानत कराने में महत्वपूर्ण सहयोग किया। उन्होंने इस सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में मिला यह साथ किसानों के लिए संबल बना।

मामला न्यायालय में विचाराधीन

वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे और समय पर खाद उपलब्ध कराने सहित किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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