“ग्राम बोरी बना मिसाल: 100% हेलमेट वाले दुपहिया चालक, महिला कमांडो ने चलाया जागरूकता अभियान”



बालोद। “सब ने यह ठाना है, हेलमेट लगाकर ही दुपहिया वाहन चलाना है”—इसी संकल्प के साथ विकासखंड बालोद के ग्राम बोरी में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जहां हेलमेट जागरूकता अभियान के तहत शत-प्रतिशत दोपहिया वाहन चालकों के पास हेलमेट सुनिश्चित किया गया


🚦 महिला कमांडो की पहल से बदली तस्वीर

समाजिक बुराइयों के खात्मे और जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गठित महिला कमांडो टीम ने गांधीवादी तरीके से यह अभियान चलाया।
ग्राम बोरी की महिला कमांडो भीमेश्वरी शांडिल्य और सरस्वती साहू को विशेष प्रशिक्षण देकर इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई।


📊 डोर-टू-डोर सर्वे से मिली सफलता

महिला कमांडो ने गांव में घर-घर जाकर सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि:

  • कुल दुपहिया वाहन: 192
  • उपलब्ध हेलमेट: 192

जिन लोगों के पास हेलमेट नहीं था, उन्हें लगातार प्रेरित किया गया, जिसके बाद उन्होंने भी हेलमेट खरीदा। यह पूरा कार्य बिना किसी दबाव, पूरी तरह जागरूकता और समझाइश से किया गया।


👮 प्रशासन और पुलिस का मिला मार्गदर्शन

इस अभियान को आईजी दुर्ग रेंज श्री अभिषेक शांडिल्य और एसपी बालोद श्री योगेश पटेल के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
पद्मश्री शमशाद बेगम ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को लेकर अधिकारियों ने गंभीर चिंता जताई थी, जिसके बाद इस अभियान को तेज किया गया।


🏡 परिवार से शुरू हो सुरक्षा की आदत

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने भी हेलमेट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “परिवार में भी यह सुनिश्चित करें कि बिना हेलमेट के कोई वाहन न चलाए।”
उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि उनका पुत्र भी सीट बेल्ट लगाए बिना गाड़ी स्टार्ट नहीं करने देता।


🤝 ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग

इस अभियान में ग्राम सरपंच श्रीमती अंबिका ठाकुर, ग्रामीण अध्यक्ष भागवत राम साहू, एवं सहयोगी जनकल्याण समिति के रफीक खान का विशेष योगदान रहा।
साथ ही महिला कमांडो रेवती साहू, भक्तिन साहू, क्षमता साहू ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।


🌟 अब अन्य गांवों में भी बनेगा मॉडल

ग्राम बोरी में मिली इस सफलता को अब अन्य गांवों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और हर व्यक्ति सुरक्षित घर लौट सके।


👉 यह पहल न सिर्फ जागरूकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर समाज ठान ले, तो बदलाव संभव है।

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