डोंगरगढ़/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़–तुमडीबोड़ मार्ग पर स्थित गढ़ माता रेंगाकठेरा मंदिर आज एक प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। प्राकृतिक वातावरण और गहरी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है।
1970 से शुरू हुई आस्था की कहानी
स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस स्थल के बारे में पहली बार वर्ष 1970 के आसपास जानकारी सामने आई। इसके बाद ग्राम पटेल नकुल पटेल ने यहां पूजा-अर्चना की शुरुआत की। बताया जाता है कि उनके पुत्र के गुम हो जाने पर जब वह सकुशल वापस लौट आए, तब परिवार ने मां के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।
इस संकल्प को आगे बढ़ाते हुए मदन शर्मा (डोंगरगढ़) द्वारा मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया, जो धीरे-धीरे एक बड़े धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हुआ।
2002 में समिति गठन, 7 ज्योति से 783 ज्योति तक का सफर

मंदिर के व्यवस्थित संचालन के लिए वर्ष 2002 में एक समिति का गठन किया गया। शुरुआत में यहां मात्र 7 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ती मान्यता के चलते आज यह संख्या बढ़कर 783 ज्योति कलश तक पहुंच चुकी है।

मंदिर समिति के प्रथम अध्यक्ष मोहनलाल श्रीवास रहे, जबकि वर्तमान में अध्यक्ष रामदुलार साहू हैं और सचिव के रूप में प्रेमलाल वर्मा अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शुरुआत में कुल 7 सदस्यों के साथ समिति का गठन हुआ था, जो आज विस्तारित रूप में कार्य कर रही है।
दूर दूर के श्रद्धालु जलाते हैं जोत
बालोद जिले के शिक्षक ओमकार सोनसारवा ने बताया कि हम भी स्थाई रूप से दोनो नवरात्रि में इस मंदिर में जोत जलवाते हैं। मेरे साथ अनिल कुमार बुधोलिया पिता गोपाल प्रसाद बुधोलिया बिना जिला सागर एमपी भी जलवाए हैं।
खोई हुई चीजें मिल जाने की अनोखी मान्यता
गढ़ माता रेंगाकठेरा मंदिर की सबसे खास और अनोखी मान्यता यह है कि यहां गुम हुई वस्तु या पशु भी मिल जाते हैं।
- श्रद्धालु नारियल लेकर माता के समक्ष संकल्प लेते हैं।
- मन्नत पूरी होने या खोई चीज मिलने पर भक्त यहां आकर नारियल अर्पित करते हैं।
इस मान्यता के कारण दूर-दूर से लोग यहां अपनी समस्याओं के समाधान और मन्नत लेकर पहुंचते हैं।
नवरात्रि में विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र

नवरात्रि के दौरान यहां विशेष रूप से ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं और मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से भर जाता है। सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं।
प्रकृति और श्रद्धा का संगम
पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालु मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी महसूस करते हैं।
गढ़ माता रेंगाकठेरा मंदिर आज सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारिक मान्यताओं का केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास और भी मजबूत होता जा रहा है।
