बालोद। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां पूरे जिले में देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहीं गुरूर विकासखंड के ग्राम मिर्रीटोला स्थित मावली माता मंदिर अपनी अनोखी परंपरा, गहरी आस्था और सांस्कृतिक विरासत के कारण विशेष पहचान बनाए हुए है। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
स्वयंभू मानी जाती है माता की प्रतिमा
ग्राम मिर्रीटोला के प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार माता की प्रतिमा स्वयं जमीन से प्रकट हुई थी, जिसके कारण इसे स्वयंभू माना जाता है। ग्रामीणों का विश्वास है कि माता की कृपा से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
अनोखी परंपरा: महिलाओं का प्रवेश वर्जित
मंदिर की सबसे विशेष और चर्चा का विषय इसकी अनूठी परंपरा है। यहां महिलाओं का मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित है, वे केवल मुख्य द्वार तक पहुंचकर ही पूजा-अर्चना करती हैं। हालांकि 12 वर्ष तक की बालिकाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। ग्रामीणों के अनुसार माता को कुंवारी देवी के रूप में पूजा जाता है, जिसके चलते यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, देवी जागरण और सामूहिक पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित कर माता से मनोकामनाएं मांगते हैं। गांव के लोग मिलकर मंदिर की सजावट और प्रसाद वितरण की व्यवस्था संभालते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
19 मार्च से ज्योति कलश स्थापना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

पुरूर के कमल देव साहू के अनुसार 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को सुबह 10 बजे ज्योति कलश स्थापना के साथ नवरात्रि महोत्सव की शुरुआत होगी। इसके बाद लगातार सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे—
- 23 मार्च: दिया के अंजोर लोक कला जस झांकी परिवार (पेंड्री, गुण्डरदेही, बालोद)
- 24 मार्च: सुर सुरभि पंडवानी मंडली (मड़ेली, छुरा, गरियाबंद)
- 25 मार्च: जय मारदेव मारिया पुरन जस झांकी परिवार (पचपेड़ी, भखारा, धमतरी)
अष्टमी-नवमी पर विशेष आयोजन
26 मार्च (अष्टमी) को हवन एवं महाप्रसादी वितरण किया जाएगा, वहीं 27 मार्च (नवमी) को ज्योति कलश विसर्जन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष आनंदराम साहू एवं ग्राम पटेल कीर्तन राम माला ने सभी क्षेत्रवासियों से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने का आग्रह किया है।
आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक
मिर्रीटोला का मावली माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। आधुनिक समय में भी यहां सदियों पुरानी मान्यताएं आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही हैं। नवरात्रि के दौरान जब पूरा क्षेत्र “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठता है, तब यह धाम श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और विश्वास का केंद्र बन जाता है।
