बालोद, 10 मार्च 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार बालोद जिले में ‘लखपति दीदी पहल’ महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही है। बिहान योजना के माध्यम से जिले की 18 हजार 233 महिलाएं एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। महिलाएं अब आधुनिक तकनीक को अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और कई महिलाएं ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रही हैं।
उल्लेखनीय है कि ‘लखपति दीदी’ भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत देशभर में तीन करोड़ महिलाओं को प्रशिक्षित कर उनके परिवार की न्यूनतम वार्षिक आय एक लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन में बालोद जिले में भी इस योजना को व्यापक रूप से लागू किया जा रहा है।
इस पहल के तहत सबसे पहले बिहान से जुड़ी महिलाओं की वर्तमान आय और परिवार के आय स्रोतों का सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद परिवारों को आय के आधार पर 0–25 हजार, 26–60 हजार और 60–99 हजार की श्रेणियों में विभाजित कर संभावित लखपति दीदी की सूची तैयार की गई। आगे महिलाओं की रुचि और कार्यक्षमता के अनुसार उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया। इसके लिए आरसेटी, आजीविका महाविद्यालय, एनआरएलएम तथा कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण आयोजित किए गए।
महिलाओं को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 1300 स्वयं सहायता समूहों को लगभग 109 करोड़ रुपये का समूह ऋण, 7.80 करोड़ रुपये का सामुदायिक निवेश कोष और 160 चक्रिय निधि प्रदान की गई। इसके अलावा 700 समूहों को महिला उद्यमिता ऋण योजनाओं के तहत लगभग 6 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। क्लस्टर स्तरीय संगठनों के माध्यम से भी 40 करोड़ रुपये से अधिक का आंतरिक ऋण वितरण किया गया।
ड्रोन दीदी भूनेश्वरी बनी मिसाल

बालोद जिले के परसदा डंग गांव की श्रीमती भूनेश्वरी साहू इस पहल की प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी हैं। एक सामान्य गृहिणी से ‘ड्रोन दीदी’ बनने तक का उनका सफर कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
भूनेश्वरी बताती हैं कि पहले उनके परिवार की वार्षिक आय मात्र 60 हजार रुपये थी। बिहान योजना के तहत उनका चयन ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में किया गया और उन्हें इंदिरा उड़ान अकादमी ग्वालियर में 15 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवाई और उर्वरक का छिड़काव शुरू किया।
अब तक वे लगभग 2950 एकड़ खेतों में धान, गन्ना, चना और सरसों की फसलों पर ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं। इस कार्य से उन्हें 3.90 लाख रुपये की आय हुई है और अन्य स्रोतों को मिलाकर उनके परिवार की कुल आय 5.14 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। आज गांव में लोग उन्हें ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पहचानते हैं।
जिले में 25 हजार लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन, उपमुख्यमंत्री के समन्वय और कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन में जिले में लखपति दीदी अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले में 25 हजार लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 18,233 महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि शेष महिलाओं को भी जल्द ही इस श्रेणी में लाने के लिए माइक्रो लेवल पर कार्य योजना बनाकर डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। आने वाले समय में महुआ लड्डू निर्माण, सेनेटरी पैड उत्पादन, अचार निर्माण जैसी गतिविधियों को बड़े स्तर पर विकसित करने की भी योजना तैयार की गई है, जिससे महिलाओं की आय में और वृद्धि हो सके।
इस तरह लखपति दीदी पहल बालोद जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई दिशा दे रही है।
