अनाथ बालिका को परिवार का हिस्सा बनाने के प्रेरक कार्य पर बालोद की थ्रीमा साहू सम्मानित



रायपुर में आयोजित महिला सम्मान समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदान किया “बालिका शिक्षा प्रोत्साहन सम्मान”

बालोद। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित महिला सम्मान कार्यक्रम में बालोद की थ्रीमा विनोद साहू को एक अनाथ बालिका को अपने परिवार का हिस्सा बनाकर उसके पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी लेने के प्रेरक कार्य के लिए “बालिका शिक्षा प्रोत्साहन सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से प्रदान किया गया।

फोस्टर केयर के तहत अनाथ बालिका को अपनाया

थ्रीमा साहू एक गृहिणी हैं और उनके पति सरकारी कर्मचारी हैं। उनके परिवार में पहले से एक पुत्र (11 वर्ष) और एक पुत्री (9 वर्ष) हैं। समाज के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए उन्होंने हाल ही में 7 वर्ष की एक अनाथ बालिका को फोस्टर केयर के तहत अपने परिवार का हिस्सा बनाया है।

उन्होंने बताया कि यह निर्णय किसी सामाजिक दबाव, दिखावे या सम्मान की अपेक्षा में नहीं लिया गया, बल्कि इस दृढ़ विश्वास के साथ लिया गया कि यदि हम सक्षम हैं तो किसी निराश्रित बालिका को परिवार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देना हमारा कर्तव्य है।

“बालिका को आश्रय नहीं, शिक्षा और आत्मनिर्भरता देना लक्ष्य”

थ्रीमा साहू का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बालिका को आश्रय देना नहीं, बल्कि उसे शिक्षा, संस्कार, स्नेह, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है। वे उस बालिका को अपने बच्चों के समान ही अवसर, प्रेम और मार्गदर्शन दे रही हैं ताकि वह आगे चलकर समाज की एक सशक्त और स्वावलंबी नागरिक बन सके।

समाज को दिया प्रेरणा का संदेश

थ्रीमा साहू का मानना है कि आज कई परिवार निसंतानता के उपचार में बड़ी राशि खर्च करते हैं, जबकि उसी सामर्थ्य से किसी अनाथ बालिका को अपनाकर उसके जीवन को संवारा जा सकता है और एक परिवार को नई खुशियां मिल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर सक्षम परिवार किसी एक अनाथ बालिका का सहारा बन जाए, तो कई बच्चों का जीवन संवर सकता है। इस सम्मान को उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा बताते हुए सभी शुभेच्छुओं के स्नेह, आशीर्वाद और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

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