संस्कृति पर चोट बर्दाश्त नहीं : 14 फरवरी शहीद दिवस के रूप में मनाएं – उमेश कुमार सेन



बालोद। विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक उमेश कुमार सेन ने जिले के युवाओं से सख़्त लेकिन संवेदनशील शब्दों में आह्वान किया है कि 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के स्थान पर शहीद दिवस एवं मातृ-पितृ सम्मान दिवस के रूप में मनाया जाए। उन्होंने कहा कि संस्कृति से समझौता और शहीदों की शहादत का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

उमेश कुमार सेन ने कहा कि वे कोई औपचारिक बयान नहीं, बल्कि अपने भीतर के दर्द और जिम्मेदारी की आवाज़ रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं इसी समाज का बेटा हूँ। जब अपने ही घर के बच्चे विदेशी दिखावे को आधुनिकता समझें और अपनी जड़ों से कटें, तो चुप रहना अपराध हो जाता है।”

उन्होंने दो टूक कहा कि 14 फरवरी 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने फाँसी का फंदा चूमा था। यह तारीख़ गुलाब और कार्ड की नहीं, बल्कि बलिदान और संकल्प की है। इसे दिखावे के प्रेम में बदल देना शहीदों के त्याग का अपमान है।

युवाओं के भटकाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति की अंधी नकल से परिवार, मर्यादा और सामाजिक संतुलन कमजोर हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम युवाओं को दोषी नहीं ठहराते, लेकिन भ्रम को भ्रम कहना ज़रूरी है। प्रेम मर्यादा से सुंदर होता है, उच्छृंखलता से नहीं।”

बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक के रूप में उन्होंने कहा कि भारतीय समाज सार्वजनिक मर्यादा के उल्लंघन और संस्कृति के उपहास को स्वीकार नहीं करेगा। “संस्कारों की रक्षा हमारा दायित्व है—यह चेतावनी नहीं, स्पष्ट संदेश है,” उन्होंने कहा।

उमेश कुमार सेन ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि 14 फरवरी को शहीदों को श्रद्धांजलि दें, माता-पिता के चरण स्पर्श कर सम्मान करें और आधुनिकता के साथ संस्कारों का संतुलन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम वही है जो त्याग सिखाए, सम्मान जोड़ें और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जगाए।

उन्होंने अंत में कहा, “संस्कृति पर चोट बर्दाश्त नहीं—चुप्पी तोड़नी पड़ेगी। 14 फरवरी गुलाब का नहीं, बलिदान का दिन है। युवा दोषी नहीं, भ्रमित हैं—दिशा देना हमारी जिम्मेदारी है। मर्यादा के बिना प्रेम नहीं, संस्कार के बिना भविष्य नहीं।”

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