महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्परता से कचांदुर में रुका बाल विवाह, जागरूकता पर फिर उठे सवाल



बालोद। महिला एवं बाल विकास विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचांदुर में एक बाल विवाह को समय रहते रोक लिया गया। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और विवाह की प्रक्रिया को निरस्त कराया।

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने बताया कि सोमवार 12 जनवरी 2026 को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के तत्काल बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम संबंधित युवक विशाल पिता राजकुमार के निवास पर पहुंची और परिवार को बाल विवाह के दुष्परिणामों व कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। जांच में युवक की आयु 19 वर्ष पाई गई, जो विधि अनुसार विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है। समझाइश के बाद युवक एवं उसके माता-पिता ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए युवक के 21 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने पर सहमति जताई।

कार्रवाई के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति में पंचनामा भी तैयार किया गया। विभाग की तत्परता से एक नाबालिग के भविष्य को सुरक्षित किया जा सका।

हालांकि यह घटना एक अहम सवाल भी खड़ा करती है। बालोद जिला, जिसे देशभर में बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, वहां फिर बाल विवाह का प्रयास सामने आना चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि कानून के बावजूद समाज के कुछ वर्गों में अब भी जागरूकता की कमी है या फिर लोग जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। अगर समय रहते सूचना न मिलती तो यह विवाह भी चुपचाप संपन्न हो सकता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह के दुष्परिणामों—स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास—को लेकर निरंतर जनजागरूकता आवश्यक है। प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय समाज, जनप्रतिनिधि और परिजन यदि सजग न हों, तो ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना कठिन हो सकता है। कचांदुर की यह घटना बताती है कि प्रशासन और स्थानीय सूत्रों की सजगता से ही बाल विवाह पर प्रभावी रोक संभव है।

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