समाजसेवी संजय बैस ने पिता की पुण्यतिथि को बनाया सेवा का संकल्प, पहली किस्त में 60 लोगों की आंखों में लौटाई रोशनी



👉 695 लोगों का हुआ सफल नेत्र जांच ।
👉 270 लोगों को किया गया निशुल्क का चश्मा वितरण ।
👉 168 लोगों का होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन ।
👉प्रथम बार में 29 दिसंबर को 60 लोगों का हुआ ऑपरेशन दूसरी बार 2 जनवरी को जाएंगे 60 लोग तथा अंतिम बार 48 का होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन ।
👉 गणेश विनायक अस्पताल रायपुर का मिल रहा है पूर्ण सहयोग ।
बालोद- माता-पिता की सेवा संतान का धर्म है, लेकिन उनके देहावसान के बाद उनके नाम पर समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा करना ही सच्ची ‘पितृ-भक्ति’ है। कुसुमकसा क्षेत्र में पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस ने इस परिभाषा को चरितार्थ कर दिखाया है। अपने पिता की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्होंने केवल श्री मद भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया साथ ही परोपकार का ऐसा दीप जलाया, जिसमें पहले किस्त में 29 दिसंबर सोमवार को 60 व्यक्तियों को लेकर संजय बैस स्वयं रायपुर लेकर गए थे सफल ऑपरेशन के बाद वे कल सभी 60 लोगों को वापस कुसुमकसा लेकर आए हैं । जहां सभी मरीजों का सफल ऑपरेशन के लिए बधाई देकर भव्य स्वागत किया गया । आगामी 2 जनवरी कल फिर 60 लोगों को ऑपरेशन के लिए रायपुर ले जाया जाएगा तथा इसके बाद इसके बाद 48 लोगों को ऑपरेशन के लिए रायपुर ले जाया जाएगा । इस तरह कुल 168 लोगों का किया जाएगा नेत्र ऑपरेशन जाएगा । आपरेशन कराकर लौटीं जयंती बाई नेताम ने रुधे गले से बताया कि संजय ने एक बेटे का फर्ज निभाया है। आंखों के आपरेशन से लेकर हमारे आने-जाने और खाने-पीने की इतनी अच्छी व्यवस्था की थी कि हमें महसूस ही नहीं हुआ कि हम घर से बाहर हैं। वहीं, अनुपा नामक महिला ने कहा कि भागवत कथा के साथ इतना बड़ा शिविर लगाना और फिर खुद के खर्च पर रायपुर ले जाकर इलाज कराना एक महान कार्य है। इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मरीजों को घर से अस्पताल ले जाने, वहां रहने, भोजन, दवाइयों और आपरेशन का पूरा खर्च बैस परिवार ने वहन किया। प्रत्येक मरीज को एक विशेष पहचान पत्र पहनाया गया था ताकि अस्पताल में उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

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