DAILY BALOD NEWS

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नव चेतना समाजसेवी संगठन द्वारा तुलसी पूजन दिवस श्रद्धा–भक्ति के साथ संपन्न

तुलसी के औषधीय, वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक गुणों से समाज को किया गया जागरूक

बालोद। नव चेतना समाजसेवी संगठन के तत्वावधान में तुलसी पूजन दिवस अत्यंत श्रद्धा, आस्था एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर संगठन द्वारा प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय सनातन परंपरा में तुलसी के अद्वितीय महत्व के प्रति समाज को जागरूक करने का भावपूर्ण संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान संगठन की बहनों ने विधिविधान से तुलसी माता का पूजन किया। तुलसी के पौधे पर गंगाजल, कच्चा दूध एवं सिंदूर अर्पित कर, पुष्पमालाओं से श्रृंगार किया गया। पेड़ा का भोग लगाकर घी का दीपक प्रज्वलित किया गया तथा कपूर से भक्तिपूर्वक आरती संपन्न हुई। तत्पश्चात उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा तुलसी माता की सामूहिक स्तुति गाई गई। इस समाजसेवी संगठन से जुड़ी पद्मिनी साहू, रेणुका निषाद, दुर्गा जोशी, डिलेश्वरी साहू, रुक्मणी कोसरे, रीता पाठक, ज्योति कौशल, डॉ. यामिनी साहू, सरिता साहू, सुशीला गरिया सहित अनेक बहनें निरंतर समाज सेवा, संस्कृति संरक्षण एवं जन-जागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।
संगठन की संयोजिका पद्मिनी देवेंद्र साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि तुलसी पूजन का मूल उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति एवं जीवन मूल्यों से पुनः जोड़ना है। आज की भौतिकवादी जीवनशैली में लोग तुलसी जैसे पवित्र, औषधीय एवं जीवनदायी पौधे के स्थान पर सजावटी पौधों, प्लास्टिक के फूलों एवं कैक्टस को प्राथमिकता देने लगे हैं। तुलसी के माध्यम से हम समाज को उसके धार्मिक, औषधीय एवं वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराना चाहते हैं।

तुलसी के आध्यात्मिक गुण:

उन्होंने बताया कि शास्त्रों में तुलसी को अत्यंत पुण्यदायिनी एवं पावन माना गया है। मान्यता है कि तुलसी वन समस्त पापों का क्षय करता है तथा पुण्य एवं इच्छित फल की प्राप्ति कराता है। जो व्यक्ति अपने घर में तुलसी का रोपण करता है, उसे यमराज के दर्शन नहीं करने पड़ते। तुलसी की गीली मिट्टी का शरीर पर लेपन कर स्नान करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है तथा तुलसी की 108 बार परिक्रमा करने से जीवन में दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।

वैज्ञानिक गुण:
तुलसी का पौधा दिन-रात निरंतर ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे वातावरण शुद्ध एवं स्वास्थ्यवर्धक बना रहता है। तुलसी के समीप बैठकर प्राणायाम करने से शरीर में रोगनाशक ऊर्जा का संचार होता है, आलस्य दूर होता है, रक्त शुद्ध होता है तथा फेफड़े अधिक सशक्त बनते हैं।

औषधीय गुण:
तुलसी की पत्तियों को जल में उबालकर सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। तुलसी का काढ़ा, तुलसी की चाय अथवा तुलसी रस में अदरक एवं शहद मिलाकर सेवन करने से सर्दी-खांसी में शीघ्र राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त तुलसी का प्रयोग त्वचा रोगों, चेहरे की कांति बढ़ाने तथा बालों के सौंदर्य संवर्धन में भी प्रभावी औषधि के रूप में किया जाता है। इस अवसर पर संगठन की दुर्गा जोशी ने कहा कि इन्हीं अद्भुत गुणों के कारण हमारे पूर्वजों ने तुलसी को माता का स्थान दिया है, क्योंकि वह प्रत्येक रूप में मानव जीवन की रक्षा करती हैं। वहीं डिलेश्वरी साहू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तुलसी पूजन केवल एक पौधे का पूजन नहीं, बल्कि उसमें निहित देवत्व, ऊर्जा और जीवनदायी तत्वों का वंदन है। कार्यक्रम के समापन पर रेणुका निषाद एवं ज्योति कौशल ने समस्त नागरिकों से अपने घर-आंगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगाने तथा प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पूजन करने की भावभीनी अपील की।

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