इस गांव में छोटे बच्चों को ही होने लगा है पीलिया, 2 दिन में 14 से ज्यादा हुए शिकार, डॉक्टरी इलाज के बजाय बैगा दुनिया के चक्कर में पड़े लोग



गांव के सभी सरकारी जल स्रोत को कराया गया बंद, निजी बोर से लोग पानी भर कर रहे गुजारा, पीएचई की टीम जुटी जांच में

कमरौद में फैला बच्चों के बीच पीलिया , ग्रामीणों में दहशत, दैवीय प्रकोप की होने लगी चर्चा, बचने के लिए बच्चों को करवा रहे बैगा के पास ले जाकर झाड़ फूंक

बालोद। बालोद जिले में अंधविश्वास से जुड़ी कई घटनाएं सामने आ रही है। ऐसा ही एक मामला ग्राम कमरौद में आया है। जहां अधिकतर छोटे बच्चे पीलिया के शिकार हो रहे हैं और अधिकतर ग्रामीण अपने बच्चों को डॉक्टर को दिखाने के बजाय बैगा गुनिया के पास ले जाकर झाड़फूंक करवाने में लगे हुए हैं। कई पालक अपने बच्चों को फूंकवाने के लिए गुरुर ब्लॉक के कनेरी तक की दौड़ लगा रहे हैं। जहां कोई चर्चित बैगा उनका झाड़ फूंक से इलाज करने का दावा करता है। लगातार बच्चों को हो रही पीलिया की शिकायत लोगों के बीच एक डर का भाव भी पैदा कर रही। वहीं दैवीय प्रकोप को लेकर गांव में चर्चा तक होने लगी है। पीलिया बड़े बच्चों या ग्रामीणों को नहीं बल्कि प्राइमरी और मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले 6 से 14 साल तक के बच्चों को हो रहा है। दो दिनों में 14 से ज्यादा बच्चे पीलिया के शिकार पाए गए हैं। जिनमें कुछ का जिला अस्पताल बालोद तो कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुरदी तो कुछ का निजी अस्पताल में इलाज जारी है। वहीं अभी तक पुष्टि नहीं हो पा रही है कि बच्चे ही क्यों पीलिया के शिकार हो रहे हैं। एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग बच्चों और पालकों को पीलिया के उपचार हेतु अस्पताल जाने की सलाह दे रहे तो वहीं पीएचई विभाग द्वारा गांव के सभी सरकारी जल स्रोतों का पानी टेस्ट के लिए ले जाया गया है ताकि सच्चाई पता चल सके कि आखिर ऐसा क्यों हो क्या रहा है। इसके तहत गांव के सभी सरकारी बोर और हैंड पंप को फिलहाल बंद कर दिया गया है। लोगों को निजी बोर से पानी दिलाया जा रहा है। सरपंच सुंदर देवदास ने बताया कि साफ सफाई को लेकर पूरी सावधानी बरती जा रही है। पानी टंकी की सफाई युद्ध स्तर पर जारी है। इसके पहले भी नियमित सफाई हो रही थी। पर अचानक पीलिया होने के पीछे क्या कारण है समझ नहीं आ रहा है। इधर ग्रामीणों के बीच पीलिया को लेकर अंधविश्वास भी देखने को मिल रहा है। लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय अपने बच्चों को बैगा गुनिया के पास भी फूंकवाने के लिए ले जा रहे हैं। बच्चों के बीच में फैले इस पीलिया को लेकर गांव में किसी अनहोनी की आशंका होने लगी है। सरपंच ने बताया कि पिछले पंचवर्षीय के समय भी इसी तरह से एक बार पीलिया का प्रकोप देखने को मिला था। इस साल भी अचानक ऐसा हुआ है कुछ समझ नहीं आ रहा है कि यह किस कारण से हो रहा है। हम पूरी सावधानी बरत रहे हैं और शासन प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं। जल स्रोतों की साफ सफाई जारी है। वही सभी सरकारी बोर और हैंड पंप बंद करवाए गए हैं। लोगों को अपने निजी बोर से पानी देने की अपील की गई है। जिसके बाद लोग साथ आ रहे हैं और एक दूसरे की मदद करते हुए इस संकट की घड़ी से उबरने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बैगा गुनिया के पास जाने के बजाय अपने बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर डॉक्टर को दिखाएं ताकि किसी तरह की स्थिति ना बिगड़े। वहीं कुछ छात्राओं के बेहोश होने की घटनाएं भी सामने आ रही है। यह भी हैरत करने वाली बात है। सरपंच ने बताया कि शनिवार को भी एक 11वीं की छात्रा अचानक बेहोश हो गई । संजीवनी 108 बुलाया गया जैसे ही एंबुलेंस पहुंची उसकी आने के थोड़ी देर बाद छात्रा होश में आ गई फिर उसे अस्पताल ले जाया गया। इधर पीएचई द्वारा सभी जल स्रोतों के पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट अभी नहीं आई है। तब तक के लिए सरकारी जल स्रोतों का उपयोग बंद कराया गया है। लोगों को पूरी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। सरपंच ने बताया अभी तक दो दिन के भीतर 14 से ज्यादा बच्चे पीलिया के शिकार पाए गए हैं। जिनकी उम्र 6 से 14 साल के बीच है।

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