ग्राम अरजपुरी मंडई 30 नवंबर को,जुटेगी हजारों की भीड़ “क्षेत्रवाली माता” के करेंगे दर्शन



बालोद (डौंडी लोहारा) – वनांचल ग्राम अरजपुरी का प्रमुख मंडाई 30 नवम्बर रविवार को रखा गया है।

ग्रामीण गणेश राम रात्रे ने बताया कि राज्य की अन्य प्रसिद्ध मड़ई मेलों के साथ-साथ हमारे ग्राम अरजपुरी का मंडाई मेला क्षेत्र में अतिप्रसिद्ध है। अरजपुरी देव मंडई आसपास के लिए एक प्रमुख मंडई है जिसको देखने के लिए आसपास के ग्रामीण प्रमुख रूप से आते हैं और यहां के देवी को क्षेत्रवाली के नाम से जानते है देवी देवताओं से अपनी मुरादे मांग अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु यहां मां का दर्शन करने आते हैं जो अपनी इच्छा अनुसार मांगों को पूरा करती है इसलिए यहां मंडई आसपास के लिए प्रमुख मंडई मानी जाती है। गणेश रात्रेने कहा कि मंडई मेला हमारी धरोहर है,यह उत्सव धार्मिक चेतना का प्रतीक है,साथ ही हमारी विरासत संस्कृति और समाज के प्रति समरसता का अलौकिक संगम है।क्षेत्रवासियों को सहृदय आमंत्रित करता हूँ कि वह अपनी उपस्थिति प्रदान कर इस उत्सव में और उमंग भरे। समस्त जिला वासियों एवं प्रदेशवासि समस्त ग्रामवासी ग्राम अरजपुरी की ओर से सादर आमंत्रित है,आप सभी अपनी गरिमामई उपस्थिति प्रदान कर मंडाई मेला का आनंद लेते हुए प्रमुख उत्सव को सफल बनावे।

रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम

ग्रामीण युवा शीतल भुआर्य ने बताया कि छत्तीसगढ़ी लोक कला और संस्कृति से जुड़ी नाचा गम्मत का प्रमुख कार्यक्रम हमारे छत्तीसगढ़ के संस्कृति का प्रतीक है,ग्राम अरजपुरी के मंडाई मेले के प्रमुख उत्सव में हमारी संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने रात्रिकालीन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है,जिसमें अपनी कला को बिखेरने ग्राम अरजपुरी में ज्ञान के पूजा छत्तीसगढ़ी नाचा पार्टी मूरमाड़ी एवं ग्राम खैरकट्टा में छत्तीसगढ़ी लोक कला नाचा पार्टी घिना का कार्यक्रम रखा गया है।

ग्राम निवासी व क्षेत्र के युवा पंकज जैन ने कहा कि हमारे राज्य के मड़ई का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। बोलचाल की सामान्य भाषा में मड़ई शब्द का अर्थ मेलजोल व भेंट से होती है। मड़ई हमारी संस्कृति की विरासत है जिसे हम एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित करते हुए चले आ रहे हैं। इस उत्सव का प्रमुख उद्देश्य खरीफ फसल कटाई के बाद अपने देवी-देवताओं का धन्यवाद ज्ञापित करना तथा अपने मित्रों प्रियजनों से भेंट करने का एक उत्सव है। जिसे हम सैकड़ों साल से मनाते चले आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मेला मड़ई धर्म कर्म व संस्कृति की महत्ता को अपने साथ लिए हुए आदि काल से चली आ रही है। जिसमें इष्ट मित्रों से भेंट के साथ-साथ काम और इस दौड़ भाग की दुनिया में कुछ अच्छे पल जीवन के लिए यादगार के रूप में समेटने के लिए भी काम आते हैं। और यह मड़ई मेले हमारे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन और त्योहारों का प्रतिबिंब है।

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