
बालोद:– छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर लाटाबोड़ में आयोजित सप्त शक्ति संगम समारोह के अंतर्गत मातृशक्ति नायिका संगम एक प्रेरणादायक एवं भावनाओं से परिपूर्ण कार्यक्रम के रूप में हुआ। यह आयोजन केवल परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला मानी जाने वाली मातृशक्ति के गौरव, जागृति और नेतृत्व क्षमता का सशक्त मंच भी बनकर उभरा। इस समारोह का उद्देश्य माताओं में छिपी हुई नेतृत्व क्षमता को रौशन करना, संस्कारित पीढ़ी निर्माण में उनकी भूमिका को सम्मानित करना और शिक्षा-संस्कार के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना रहा। परिवार ही नहीं, समाज के हर आयाम में महिला की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है, और इस तथ्य को उजागर करते हुए समारोह ने मातृशक्ति को एक नई ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास प्रदान किया। नायिका संगम कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय की गरिमामयी शिक्षण परंपरा, भारतीय संस्कृति की मूल भावना तथा माताओं की रचनात्मक शक्ति को एक सूत्र में पिरोया गया। मंच पर विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से माताओं ने बाल संस्कार, चरित्र निर्माण, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक योगदान जैसे मुद्दों को सहज, मधुर और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। यह आयोजन महिलाओं की उस अद्भुत शक्ति की याद दिलाता है जो प्रेम, अनुशासन और ज्ञान का सुंदर समन्वय करती है।

समारोह में विद्यालय परिवार ने यह संदेश भी स्पष्ट रूप से दिया कि मातृशक्ति केवल घर की सीमा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सर्वाधिक प्रभावशाली प्रेरणा स्रोत है। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, मजबूत आधार और नैतिक मूल्यों के निर्माण में माता का योगदान अनमोल है। इसी भावना को सम्मानित करते हुए ‘नायिका संगम’ ने महिलाओं को एक नई पहचान और उत्साह प्रदान किया।इस कार्यक्रम ने न केवल सहभागियों के मन में गर्व भर दिया, बल्कि समाज में जागृति, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत किया। मातृशक्ति के सम्मान में आयोजित यह समारोह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीप बनकर अवश्य प्रकाश फैलाएगा।

