चिकित्सा शिक्षा में अमर हुए देवसिंह सोनबेर:’ज्ञानयोग’ की पराकाष्ठा, देहदान से मृत्यु के बाद भी ज्ञान के दीप जलाकर गए
बालोद/ कुरुद- बालोद जिले के कबीर आश्रम करहीभदर के संत देवेन्द्र साहेब के पिता देवसिंह सोनबेर का निधन हो गया उनके द्वारा घोषित देहदान के तहत अंतिम संस्कार गृह ग्राम नवागांव कुरूद में हुआ पश्चात संत समाज,एवं ग्रामवासी की पावन उपस्थिति में देहदान संपन्न हुआ। सेवा, सादगी और सत्यनिष्ठा को अपना जीवन-मूल्य बनाने वाले कुरुद निवासी श्री देवसिंह सोनबेर (4 दिसंबर 1943 – 6 नवंबर 2025) ने 81 वर्ष की आयु में इस संसार को अलविदा कहा। उनका जीवन जितना कर्तव्यनिष्ठ रहा, उनकी विदाई उतनी ही प्रेरणादायक और असाधारण साबित हुई। जीवनभर कर्मयोगी रहे श्री सोनबेर ने देहांत के उपरांत अपनी देह का दान मेडिकल कॉलेज, रायपुर को कर दिया, जिससे वह मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान के दीप जलाते रहेंगे। उनका यह अनुपम कार्य ‘जीवन में ज्ञान बाँटा और विदा के बाद भी ज्ञान के दीप जलाकर गए’ की भावना को चरितार्थ करता है। यह निर्णय ‘मनुष्य मिटता नहीं, अगर वह सीख छोड़ जाए’ के सिद्धांत का जीवंत प्रमाण है।

देहदान: ज्ञान की सबसे बड़ी भेंट
श्री सोनबेर का यह कदम उन्हें ‘कलयुग के दधीचि’ के रूप में स्थापित करता है, जिन्होंने मानवता के कल्याण के लिए अपना शरीर भी समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को शोक के बजाय ज्ञानदान के उत्सव में बदल दिया। यह साधारण नहीं, बल्कि ‘कर्मयोग और ज्ञानयोग’ का असाधारण समन्वय है। अब उनकी देह मेडिकल कॉलेज, रायपुर के छात्रों के लिए एक खुली किताब होगी। छात्र उनके शरीर से सीखकर मानव शरीर की जटिलताओं को समझेंगे और भविष्य में लाखों लोगों की सेवा करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। यह त्याग चिकित्सा विज्ञान और मानवता के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का सर्वोच्च प्रमाण है।
स्व. श्रीमती जेठी बाई साहू एवं स्व. श्री शिवप्रसाद साहू के उच्च संस्कारों में पले देवसिंह सोनबेर ने अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने हमेशा एक अनुशासित और समर्पित जीवन जिया।
