लमती (कमकापार)में हुआ 12 गर्भवती बहनों का पुंसवन संस्कार, एक कुण्डीय गायत्री महायज्ञ



बालोद/डौंडीलोहारा। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ डौंडीलोहारा के मार्गदर्शन में वनांचल ग्राम लमती (कमकापार)में 12 गर्भवती बहनों का पुंसवन संस्कार एक कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ यज्ञीय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का संचालन मितानिन प्रशिक्षक तथा आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी अभियान के ब्लॉक प्रभारी खेमीन झारिया के द्वारा किया गया। झारिया दीदी ने पुंसवन संस्कार के माध्यम से गर्भस्थ शिशु को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रखने शास्त्र सम्मत जीवनचर्या अपनाने हेतु जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैसे मां मदालसा ने अपने आचार, विचार और व्यवहार को सकारात्मक, आध्यात्मिक रखकर अपने तीनों संतान को देवतुल्य, ब्रह्मज्ञानी बना दिये तत्पश्चात अपने चक्रवर्ती सम्राट पति के कहने पर एक वीर योद्धा को जन्म देकर उतराधिकारी वीर सम्राट के रूप में निर्माण किया। अतः माता केवल जन्मदात्री ही नहीं बल्कि निर्मात्री भी होती है।

घर के वातावरण को आध्यात्मिक बनाने के लिए बलि वैश्य यज्ञ के बारे में बताया गया। इस यज्ञ के माध्यम से हम घर के सभी सदस्यों के मन: स्थिति को सुंदर और सुखी बना सकते हैं। इस कार्यक्रम में संस्कार कराने हेतु सारिका, भारती, संतोषी, इंद्राणी, पल्लवी, हेमलता, दीपिका, यमुना, नंदिनी, कविता, प्रतिभा, बिना उपस्थिति रही। कार्यक्रम में दो बच्चों प्रियांशी,गुनाक्षी का अन्नप्राशन संस्कार में संपन्न हुआ। मितानिन रामेश्वरी, कैलाश बाई गोटे, अहिल्या रावटे, बिसाहीन आदि का सहयोग रहा।

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