गुरुर। गुरुर शाखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100 वर्ष पूर्ण होने पर शताब्दी वर्ष मनाया गया जिसमें पथ संचालन देऊर मंदिर से अंबेडकर चौक होते हुए पुनः मंदिर में आया गया।
जिसमें विभिन्न वक्ताओं द्वारा शाखा के प्रमुख सिद्धांतों को बताया गया। स्वयं सेवक ताम्रध्वज यादव ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूजन अनुष्ठान में प्रमुख पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। यह आयोजन संगठन की अनुशासन, राष्ट्रीय भावना और समाज सेवा की प्रतिबद्धता को उजागर करने के लिए किया गया। शस्त्र पूजन के बाद स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में शहर के मुख्य मार्गों से पथ संचलन निकाला। संघ की स्थापना का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र चेतना को बढ़ावा देना था। आज शताब्दी वर्ष में प्रवेश करते हुए हम इन मूल्यों को और प्रगाढ़ करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संघ विभिन्न समाज कल्याण कार्यक्रमों, जन संपर्क अभियानों, युवा सशक्तिकरण कार्यक्रमों को और व्यापक रूप से लाएगा। उन्होंने कहा कि संघ सौ साल से व्यक्ति निर्माण की सतत प्रक्रिया चला रहा है और देश हित ही इसका मूल उद्देश्य रहा है। इसी लक्ष्य को साकार करने के लिए संघ ने पंचतंत्र सूत्र परिवार संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वबोध और नागरिक कर्तव्य पर आधारित जागृति अभियान पूरे देश में प्रारंभ किया है।
आरएसएस के स्वयंसेवकों ने मनाया शताब्दी वर्ष, गुरुर नगर में किया पथ संचलन
