छत्तीसगढ़ मं गरबा–डांडिया के आड़ मं अश्लीलता



छत्तीसगढ़ के धरती अपन परंपरा, संस्कृति अउ सादगी बर पहिचाने जाथे. इहाँ के तिहार-उत्सव मनखे के आत्मा ल छूथे, छत्तीसगढ़ म नवरात्रि के बखत देवी भक्ति बर जस पचरा अउ सेवा गीत गाए जाथे, बाना देवता संग जँवारा अउ जोत ल देवी स्वरूप मान के पूजा करे के परम्परा हे अउ हमर संस्कृति म हमला गरब गुमान हे। फेर आजकल गरबा अउ डांडिया नाच–गान देखे जाथे। हमन जानत हन कि गरबा–डांडिया गुजरात के पारंपरिक नृत्य आय, जेकर जड़ भक्ति अउ संस्कार मं हे. धीरे–धीरे ए संस्कृति ह पूरा भारत मं पसर गीस, अउ आज छत्तीसगढ़ मं घलो ए नृत्य के आयोजन होथे. पर दुःख के बात ये आय के अपन भक्ति अउ संस्कृति के नाम मं कतेक ठन आयोजन आज “मनोरंजन अउ व्यापार” के जरिया बन गे हे. गरबा–डांडिया के आड़ मं जे अश्लीलता अउ फूहड़पन बढ़त हे, उँखर ले छत्तीसगढ़ के समाज चिंतित हे.

१. अश्लील गाना अउ नाच–गान:
गरबा के भक्ति गीत मं देवी माई के गुणगान होथे. फेर आज नवा जमाना मं डीजे अउ फिल्मी गाना मं गरबा नचाय जावत हे. जिहां देवी के भक्ति के सुर होय ला चाही, उहां भड़काऊ अउ अश्लील गाना बजाय जावत हे.

२. पहिरावा अउ फैशन:
परंपरागत गरबा मं माईलोगन मन रंग-बिरंग चुनरी, घाघरा अउ पुरुस सफेद कुरता, काठी पायजामा पहिरथें. फेर आजकाली फैशन के नाम मं अशोभनीय अउ शरीर देखाय वाले कपड़ा पहिरे जावत हे, जेकर से समाजिक मर्यादा अउ छत्तीसगढ़ के सादगी ऊपर चोट पहुँचत हे.

३. भक्ति के जगा दिखावा अउ व्यापार:
गरबा–डांडिया ह भक्ति बर नान–नान परिवार मन ल एक जगह लाय के आयोजन होथे. फेर अब इहाँ बड़का–बड़का क्लब अउ होटल मं भारी टिकट लगाके आयोजन करथें, जिहां न भक्ति रहिथे न परंपरा, सिरिफ दिखावा, पैसा अउ फूहड़ नाच–गान रहिथे.

४. नवयुवक पीढ़ी ऊपर असर:
आज के लइका–नवयुवक मन ए “मस्ती अउ भड़काऊ नाच” ल असली गरबा समझत हें. उंकर मन मं देवी पूजा अउ संस्कृति के असली रूप धीरे–धीरे नँदावत जात हे.

५. बचपन अउ परिवारिक दृष्टि:
गरबा–डांडिया ल देखे बर परिवार वाले मन अपन लइका मन ला ले जाथें. लइका मन ला लगथे के ये भक्ति अउ पूजा के उत्सव आय, फेर जब उंकर सामने अश्लील गाना, फूहड़ नाच अउ भड़काऊ कपड़ा आथे, त उंकर मासूम मन मं गलत छाप बस जाथे. आजकल स्कूल कालेज मन म घलो डांडिया के आयोजन बड़े जोरसोर ले करे जाथे,शैक्षणिक संस्थान ल घलो ए विषय म ध्यान रखना चाही।परिवार वाले मन बर ये बड़ चिंता के बात हो जाथे के भक्ति के नाम मं लइका मन गलत शिक्षा पावत हे. घरवाले मन ला घलो अब डर रहिथे के तिहार मं ले जाये त लइका मन के भक्ति सीखाय के बदला मं “गलत नकल” सिखत हें.

६. समाजिक दुष्परिणाम:
अश्लीलता अउ नशा के संग–संग कतको ठन समाजिक बेमानी ह होवत हे. झगड़ा–फसाद, छेड़छाड़ अउ अपराध के घटना बढ़त हे, जेकर से समाजिक वातावरण बिगड़त हे.

गरबा–डांडिया ह भक्ति अउ संस्कृति के उत्सव आय. छत्तीसगढ़ जइसने सादा अउ धार्मिक धरती मं एला अश्लीलता अउ फूहड़पन मं बदलना बड़ दुःखद बात आय. समाज, प्रशासन अउ आयोजक मन ल चाही के ए कार्यक्रम ल अपन असली रूप मं राखें, जेकर मं भक्ति, संस्कृति अउ मिलजुल के खुशी झलके. खास करके लइका अउ परिवार बर सुरक्षित वातावरण बने रहय, एला देखना हमर सबके जिम्मेदारी आय. अश्लीलता, फूहड़पन अउ व्यापारिक चमक–दमक ल रोकेच के हमन अपन संस्कृति के असली पहचान ल बचा सकथन.

लेखक : राम कुमार साहू, सिल्हाटी सहसपुर लोहारा कवर्धा

You cannot copy content of this page