बालोद और अंबागढ़ चौकी जिले की सीमा पर है यह गांव, वनांचल के लोगों के लिए है आस्था का केंद्र, हर साल दोनों नवरात्र पर जलते हैं मनोकामना जोत
बालोद/ डौंडीलोहारा- नवरात्रि के इस अवसर पर आज हम बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के अंतिम छोर पर बसे गांव जुन्नापानी में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर और यहां विराजित माता की कहानी सामने लाए हैं जो सिर्फ जुन्नापानी नहीं आसपास के 12 गांव के लोगों के लिए इष्ट देवी मानी जाती है। इस मान्यता के चलते जुन्नापानी की दंतेश्वरी माता को लोग बरगहिन दाई के नाम से भी जानते हैं। दोनों नवरात में लोग यहां अपनी मनोकामना जोत जलाते हैं।

वर्तमान में यहां पर क्वांर नवरात्रि में 76 ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। हमारे संवाददाता नेमन साहू ने बताया कि जुन्नापानी के इस मंदिर का ताल्लुक बस्तर के दंतेवाड़ा से बताया जाता है। किवदंती है कि वर्षों पहले गांव के कुंजाम ठाकुर बस्तर से मां दंतेश्वरी को लाकर यहां स्थापित किए थे। तब से आज पर्यंत आसपास के 12 गांव के लोगों के लिए यह आस्था का केंद्र बना हुआ है। मां अपने भक्तों को दर्शन देने हेतु फाल्गुन पर 24 घंटे में पूरे 12 गांव के अपने सेवकों के साथ जाते हैं। मंदिर के पुजारी धनेश कुंजाम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि आस्था ऐसी है कि दूर-दूर से लोग यहां अपनी मनोकामना जोत जलाने के लिए आते हैं वनांचल के लिए यह प्रमुख माता का मंदिर है, जो की बालोद जिला और अंबागढ़ चौकी जिला की सीमा पर स्थित गांव जुन्नापानी में विराजित है। यहां पर जोत जलवाने के लिए कोसों दूर से लोग आते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहां कई लोगों की मन्नतें पूरी हुई है। कुंजाम ठाकुर के द्वारा मां दंतेश्वरी को बस्तर दंतेवाड़ा से लाकर स्थापित किए जाने के बाद से इस गांव के लोग समर्पित भाव से मां दंतेश्वरी की हर साल दोनो नवरात्रि में पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। मंदिर गांव के पूर्व दिशा में 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नवरात्रि के समय प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। रात्रि में माता की सेवा में जस गीत गाने हेतु दूर-दूर से जस भजन मंडली आकर गायन करते हैं ।
होली पर मनाते हैं धुर त्यौहार

वनांचल में होली के साथ ही धुर उत्सव भी विशेष होता है। इस क्रम में दंतेश्वरी के इस मंदिर से धुर त्यौहार का भी संबंध है। मान्यता है कि यहां की मां दंतेश्वरी डांग डोरी के जरिए 12 गांवों में होली खेलने जाती है। उनके साथ ग्राम के स्त्री पुरुष सभी जाते हैं। जिस रात को ग्राम से निकलती है उसके दूसरे रात पक्ष सुबह तक गांव में वापस आते हैं। तीसरे दिन जुन्ना पानी के अधीनस्थ ग्राम जर्राडीह से होली खेलकर दोपहर से लेकर रात 12 बजे तक गांव के प्रत्येक घरों में मां दंतेश्वरी होली खेलने के लिए जाती है। यह परंपरा वर्षों पहले से चली आ रही। जिस ग्राम में दंतेश्वरी माता होली खेलने जाती है उस ग्राम की स्त्री पुरुष मां दंतेश्वरी के पीछे होकर ढोल नगाड़ा बजाते हुए फाग गीत गाकर नाचने लगते हैं। मां दंतेश्वरी 12 गांव में होली खेलने जाती है इसी कारण इसे बरगहीन या देश फिरतीन के नाम से भी जाना जाता है। तीन दिनों तक यहां धुर त्यौहार का उत्साह बना रहता है।
