दृढ़ता की कहानी: सिंगारपुर के किसान की बेटी धनेश्वरी निषाद बनी “प्रेरणास्रोत” नगर सैनिक में हुई चयनित



बेटी ने कहा : घर वाले बना रहे थे शादी के लिए दबाव पर जब तक सफल नहीं होती, शादी नहीं करने की बात पर अड़ी रही

बालोद ( कंटेन्ट यशवंत टंडन)- जब आंखों में अरमान लिया, मंजिल को अपना मान लिया तो अब मुश्किल क्या आसान क्या, जो ठान लिया सो ठान लिया यह पंक्ति को ठीक चरितार्थ किया है बालोद जिले के डौण्डीलोहरा विकासखंड व तहसील के अन्तर्गत ग्राम पंचायत सिंगारपुर के एक किसान की बेटी धनेश्वरी निषाद उम्र (22) पिता श्री संजू राम निषाद ने नगर सैनिक (होम गार्ड) के पद पर चयनित होकर पूरे जिले गांव समाज परिवार और अपने माता-पिता गुरू जनों का नाम रोशन किया है। नगर सेना में चयनित धनेश्वरी निषाद ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गांव के प्राथमिक शाला सिंगारपुर में कक्षा पहिली से पांचवीं और कक्षा छठवीं से आठवीं तक की पढ़ाई शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सिंगारपुर में किया। उसके बाद कक्षा नवमी से बारहवीं की हाईस्कूल की शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरदफोड़ में अध्ययन किया। उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए शहीद दुर्वासा निषाद शासकीय महाविद्यालय अर्जुन्दा में बीए में स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की‌।

जो युवा तैयारी कर रहे उनके लिए बताई सफलता का मूलमंत्र

धनेश्वरी निषाद ने बताया कि जो भी युवा या लड़कियों सेना या कोई सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। वो लोग अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखें और नशा से दूर रहें। साथ ही सोशल मीडिया से भी दूरी बनाकर रखें। कड़ी मेहनत करने और कभी भी निराशा या हताश नहीं होने को कहा लगातार कोशिश और मेहनत करते रहे सफलता एक दिन जरूर मिलेगी। कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी बहुत जरूरी है। बिना त्याग के कुछ भी जीवन में नहीं मिल सकता‌। लड़कियों को भी आज आत्मनिर्भर बनने की आज जरूरत है। ताकि अपने पैरों पर खड़ा हो सकें। आज जो लोग मुझसे बात नहीं करते थे वहीं लोग आज मुझे बधाई और अपने स्टेटस में स्टोरी लगाकर बधाई दे रहे हैं। सफलता मिलने के बाद जीवन में बहुत कुछ बदलाव आ गया है । घर वाले हमेशा शादी के लिए दबाव बनाए लेकिन जब तक सफल नहीं होऊंगी तब तक शादी नहीं करने का ज़िद पर अड़ी रही।

माता पिता और गुरू जनों को दिया सफलता का श्रेय

नगर सैनिक कु. धनेश्वरी निषाद ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता श्री संजू राम निषाद और माता श्रीमती रजनी बाई निषाद, अपने भैया रोहित निषाद केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), उकेश निषाद तैयारी कर रहा है।, मामा गजानंद निषाद जिला पुलिस बल और गुरू जनों को अपनी सफलता का श्रेय दिया।

2019 से तैयारी शुरू की, 2025 में मिली सफलता

धनेश्वरी निषाद ने बताया कि वह कक्षा दसवीं में थी तभी से तैयारी शुरू कर दिया था। वह प्रतिदिन सुबह उठकर दौड़ने के लिए दूसरे गांव में जाकर सुबह-शाम रोज पसीना बहाती थी। और स्वयं ही तैयारी करने के लिए संसाधन जुटाकर मेहनत करती। कई बार आर्मी भर्ती में प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली कुछ ना कुछ कमी के कारण सलेक्शन के लिए चुक जाती थी। लेकिन कभी निराश और हिम्मत नहीं हारी वो लगातार अपनी तैयारी में लगी रही। हर एक्जाम में प्रयास करती। जानकारी के लिए वो यूट्यूब और इंटरनेट का उपयोग करती थी। चाहे भर्ती आए या ना आए उन्होंने हमेशा तैयारी करना कभी नहीं छोड़ा। लगातार कड़ी मेहनत के साथ अभ्यास और प्रयास करती रही और आखिरकार 2025 में उनका नाम नगर सेना में नगर सैनिक के रूप में पूरे बालोद जिले में मेरिट लिस्ट में प्रथम नंबर पर उनका नाम चयनित होकर आया। उन्होंने कहा कि अब बेटियों भी किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है। वो आज हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं और योगदान दे रही है।स्कूल और कालेज में शुरू से ही खेल में भी हमेशा प्रथम आती थी। उन्होंने अपने मन में ठान लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं हार नहीं मानूंगी और आखिरकार उनका सपना पूरा हुआ। छत्तीसगढ़ जिला पुलिस बल में भी धनेश्वरी शारीरिक दक्षता परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुकी है। लेकिन अभी लिखित परीक्षा होनी बाकी है। वो लिखित परीक्षा की भी तैयारी कर रही है।

गांव की तीन बेटियां भी देशसेवा में, सेना के केन्द्रीय बलों में दे रही सेवाएं

गांव की तीन बेटियां जिसमें सभी केन्द्रीय बलों में अपनी सेवाएं दे रही है। जिसमें भुनेश्वरी बोरकर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), दिव्या बोरकर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), मनीषा पाल छत्तीसगढ़ पुलिस जिला बल में आरक्षण के रूप में अपनी सेवाएं दे रही है।

सफलता का कोई शार्ट-कट नहीं होता

धनेश्वरी निषाद ने कहा कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती लेकिन एक दिन जरूर मिलती है। सफलता के लिए कड़ी मेहनत समर्पण बलिदान धैर्य संयम अनुशासन और लक्ष्य निर्धारित कर सही दिशा में मेहनत करने से अवश्य सफलता मिलती है। सफलता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बचपन से ही वर्दी पहनने का जुनून और जज्बा से आज वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ। वर्दी पहनने का कुछ अलग ही फिलिंग है। यह मेरे गौरवशाली पल है‌।

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