बालोद| सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। जिसमें प्रबंध कार्यकारिणी समिति के सदस्य जगदीश देशमुख के द्वारा अध्यक्षता किया गया। विशेष अतिथि के रूप में राजेश्वर राव कृदत्त, मुख्य अतिथि डी. एस. देशमुख (से.नि. व्याख्याता)। साथ ही सक्रिय सदस्य दुर्गा प्रसाद तापड़िया , बी.आर. बेलसर के आतिथ्य में कार्यक्रम संपन्न हुआ। गुरु पूर्णिमा में विद्यालय के भैया/बहनों के द्वारा गुरु के प्रति आस्था प्रकट करते हुए गीत, कविता, नृत्य व भाषण के माध्यम से गुरु की महिमा का बखान किया गया।कार्यक्रम का संचालन आचार्य देवधर साहू के द्वारा किया गया। साथ ही उन्होंने छात्र जीवन में गुरु के महत्व पर अपना विचार प्रकट किया। समस्त आचार्य दीदीयों का सम्मान प्रबंध कार्यकारिणी समिति के माध्यम से विद्यालय गणवेश व श्रीफल भेंट कर किया गया। आशीर्वचन के रूप में विशेष अतिथि राजेश्वर राव कृदत्त द्वारा हमारे प्राचीन महान गुरुओं की जीवनी पर अपना विचार व्यक्त किया। साथ ही महर्षि वेदव्यास व राष्ट्र गुरुओं की जीवनी से प्रेरित होकर हमें सही दिशा में जाने का मार्गदर्शन दिया।
विद्यार्थी जीवन में समर्पण व अनुशासन का बड़ा महत्व
मुख्य अतिथि डी.एस. देशमुख ने अपने शिक्षण जीवन के अनुभव को बताया। साथ ही विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया कि अगर हम बड़ा लक्ष्य लेकर चलेंगे तो निश्चित ही हमें आगे सफलता प्राप्त होगी। साथ ही बताया कि दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं है, अगर हमारे अंदर समर्पण का भाव हो और मन में आगे बढ़ने की चाह हो तो परिस्थितियां कभी हमें नहीं रोक सकती, केवल प्रयास करने की जरूरत होती है। साथ ही अनुशासन का महत्व बताते हुए सभी को अनुशासित रहने की सीख भी दी और बताया कि अनुशासित रहने वाले ही आगे बढ़ सकते है। आभार प्रदर्शन जगदीश देशमुख के द्वारा किया गया, उन्होंने वेदव्यास का अर्थ बताते हुए कहा कि वेद का अर्थ है ज्ञान और व्यास का अर्थ है विस्तार अर्थात वेदव्यास का अर्थ है ज्ञान का विस्तार करने वाला जो कि गुरु ही है। साथ ही गौतम बुद्ध के जीवन के बारे में अपना विचार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में प्राचार्य दीनदयाल साहू व समस्त आचार्य, दीदियों और विद्यार्थियों की पूर्ण सहभागिता रही।
