बालोद। छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ विकलांग मंच बालोद से जुड़े दिव्यांगों द्वारा अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर बालोद में एक दिवसीय पैदल मार्च किया गया। जिसे दिव्यांगों द्वारा दिव्यांग एवं निराश्रित विधवा स्वाभिमान पैदल मार्च नाम दिया गया था। अब नहीं सहिबो, अपन अधिकार ले के रहीबो,,, के नारे के साथ इस दौरान दिव्यांगों ने नगर में रैली निकालते हुए जमकर शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाज की और उन्हें अपना वादा याद दिलाया। वही रैली उपरांत दिव्यांगों के बीच स्वयं तहसीलदार और एसडीएम ज्ञापन लेने के लिए कचहरी चौक के पास पहुंचे और उनकी मांगों को शासन प्रशासन से अवगत कराने की बात कही। नया बस स्टैंड से दल्ली चौक होते हुए घड़ी चौक से होकर जय स्तंभ चौक के पास रैली समाप्त हुई। इस दौरान जिले भर से पहुंचे महिला पुरुष दिव्यांग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
क्या है वे छह मांगे
- संघ के शिकायती पत्रों में उल्लेखित एवं संलग्न छग पीएससी से चयनित 7 डिप्टी कलेक्टर, 3 लेखा अधिकारी, 3 नायब तहसीलदार, 2 सहकारिता निरिक्षक, 3 पशु चिकित्सक सहित 127 एवं 24, कुल 151 समस्त फर्जी दिव्यांगजनो का राज्य मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता का भौतिक परीक्षण कराकर फर्जियों को तत्काल बर्खास्त किया जाये।
- समस्त विभाग में दिव्यांग कोटे के बैकलॉग पदो पर विशेष भर्ती अभियान विज्ञापन जारी किया जावे। इसके परिपत्र जारी किया जा चुका है। वित्त विभाग ने 31.3.25 तक भर्ती में छूट भी दिया है लेकिन आज दिनांक तक किसी भी विभाग के द्वारा विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।
- दिव्यांगजनो को दिव्यांग वंदन योजना बनाकर प्रतिमाह 5000 रू मासिक पेंशन दिया जावे। बीपीएल. की बाध्यता खत्म किया जावे। अन्य राज्यो में पेंशन 3000 एवं 4500 है। हमारे राज्य में 5000 प्रतिमाह किया जावे। इस राज्य में मात्र 2 लाख 76 हजार 98 लोग (40% अधिक) दिव्यांग है।
4 .21 साल से अधिक आयु के अविवाहित दिव्यांग युवती को महतारी वंदन योजना में शामिल किया जावे। दिव्यांगता के कारण शादी न होने पर महतारी वंदन का लाभ 5000 रु मासिक पेंशन के अलावा अलग से दिया जावे।
- शासकीय पदों पर नियुक्त दिव्याग शासकीय अधिकारियो कर्मचारियों को पदोन्नती पर 3 प्रतिषत आरक्षण का प्रावधान है। जिसे कोई विभाग पालन नहीं कर रहा है। शासन के निर्धारित मापदड अनुसार 3 प्रतिशत पदो पर 1.11.2016 से पदोन्नत पदो की गणना कर तत्काल उसके 3 प्रतिशत पर पदोन्नती प्रदान करे। इस हेतू परिपत्र जारी किया जावे। शासन प्रशासन कोर्ट कभी भी दिव्याग कर्मियों को पदोन्नती में आरक्षण देने पर रोक नहीं है। इसके बावजूद सभी विभाग जानकारी के अभाव में पदोन्ती प्रक्रिया को बाधित करके रखे है।
- कोरोना काल के पूर्व के स्वरोगजार हेतू दिव्यांगजनो के द्वारा लिए गए निःशक्त वित्त निगम के कर्ज माफ किया जावे। कोरोना के पूर्व दिव्यांगजनो के द्वारा लिए गए लोन को माफ किया जावे क्योकि कोरोना काल में सभी का व्यापार चौपट हो गया है।
