गुरुर। क्षेत्र के समाज सेवी जयंत किरी ने शासन प्रशासन से सभी सरकारी दफ्तरों में व्हीलचेयर रखने की जनहित में मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल ही में जिला पंचायत राजनांदगांव का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक
महिला जो दिव्यांग है बड़ी मुश्किल से जा रही है। वहां व्हीलचेयर का इंतजाम नहीं दिख रहा है ।वीडियो में जिला पंचायत सीईओ दिव्यांग स बातचीत कर रही है। जिस पर दिव्यांग महिला ने समस्या बताते हुए कहा भी है यहां व्हीलचेयर होना चाहिए पर है नहीं। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाज सेवी जयंत किरी ने इसे विडंबना बताया है। ऐसी स्थिति बालोद जिले सहित गुरुर ब्लॉक के विभिन्न दफ्तर में भी है। जहां सरकारी दफ्तर होने के बावजूद व्हीलचेयर का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे भी सरकार को इस ओर काफी गंभीरता से ध्यान देना होगा। ताकि दिव्यांगों को राहत मिले ।समाज सेवी जयंत किरी ने शासन प्रशासन से मांग की है कि सभी सरकारी दफ्तर जैसे तहसील ऑफिस ,जनपद पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत सहित विभिन्न कार्यालय में व्हीलचेयर का इंतजाम हो। ताकि आने वाले दिव्यांग फरियादियों को कभी घसीटते हुए या मशक्कत करते हुए जाने की जरूरत ना पड़े। यह काफी चिंताजनक है कि सरकारी दफ्तरों में व्हीलचेयर का पर्याप्त इंतजाम नहीं है। भारत सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थानों को सुलभ बनाने के लिए कई नीतियां और योजनाएं बनाई हैं, जैसे “सुगम्य भारत अभियान”। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर इनकी कमी अक्सर देखने को मिलती है।
क्या है सुलभ भारत अभियान
इस अभियान का उद्देश्य सरकारी भवनों, परिवहन और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) पारिस्थितिकी तंत्र को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना है। इसमें रैंप, सुलभ शौचालय, ब्रेल लिफ्ट और व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं का प्रावधान शामिल है। वहीं दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act) 2016 के तहत, दिव्यांगजनों को सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच का अधिकार है, जिसमें सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं।
कुछ योजनाएं जो सहायक उपकरण प्रदान करती हैं
राष्ट्रीय वयोश्री योजना में बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) कार्डधारक 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त सहायक उपकरण जैसे व्हीलचेयर, छड़ी, सुनने की मशीन आदि प्रदान करती है।
वहीं कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराती हैं, जैसे कि राजस्थान में इलेक्ट्रिक पावर व्हीलचेयर की योजना है।
इन नीतियों और योजनाओं के बावजूद, कई सरकारी कार्यालयों में अभी भी दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक सुविधाएं, विशेष रूप से व्हीलचेयर की कमी देखी जाती है। कभी-कभी उपलब्धता होती भी है, तो कर्मचारियों को इसके उपयोग और दिव्यांगजनों की सहायता के लिए उचित प्रशिक्षण नहीं मिलता। देखभाल और रखरखाव की कमी के कारण भी व्हीलचेयर अनुपलब्ध या खराब स्थिति में हो सकती हैं। जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जहां लोग इन सुविधाओं के महत्व को नहीं समझते।
समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने,नियमों का सख्त पालन जरूरी
समाज सेवी श्री किरी नेक सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी दफ्तरों में सुलभता से संबंधित नियमों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। सुविधाओं की उपलब्धता और उनकी कार्यक्षमता की जांच के लिए नियमित ऑडिट और निरीक्षण किए जाने चाहिए। सरकारी कर्मचारियों और आम जनता के बीच दिव्यांगजनों की जरूरतों और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए। वहीं कर्मचारियों को दिव्यांगजनों के साथ व्यवहार करने और उनकी मदद करने के लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली जैसी एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली होनी चाहिए। जहां दिव्यांगजन सुविधाओं की कमी या अन्य समस्याओं की शिकायत कर सकें। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हमारे सरकारी दफ्तर सभी नागरिकों के लिए सुलभ हों, चाहे उनकी शारीरिक क्षमता कुछ भी हो।
